नई दिल्ली। तेजी से डिजिटल हो रहे भारत पर साइबर खतरों का जाल तेजी से जकड़ता जा रहा है। प्रसिद्ध साइबर सुरक्षा फर्म कैस्परस्की (Kaspersky) की ‘ग्लोबल रिसर्च एंड एनालिसिस टीम’ की नवीनतम रिपोर्ट ने देश के लिए बड़ी खतरे की घंटी बजा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र के उन शीर्ष पांच देशों में शामिल हो गया है, जो ‘एडवांस्ड पर्सिस्टेंट थ्रेट्स’ (APT) यानी बेहद सुनियोजित और जटिल साइबर हमलों के मुख्य रडार पर हैं। इस सूची में भारत के साथ चीन, म्यांमार, पाकिस्तान और वियतनाम जैसे देश भी शामिल हैं।
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AI बना हैकर्स का नया हथियार और 7.5 करोड़ हमले ब्लॉक
रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक खुलासा यह हुआ है कि साइबर अपराधी अब अपने हमलों को अधिक सटीक और खतरनाक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं। एआई के जरिए हैकर्स सिस्टम की कमियों को तेजी से तलाश रहे हैं और नए मालवेयर तैयार कर रहे हैं। यद्यपि वर्ष 2026 की पहली छमाही में कुछ श्रेणियों के हमलों में मामूली गिरावट देखी गई, इसके बावजूद कैस्परस्की ने APAC क्षेत्र में 7.5 करोड़ (75 मिलियन) हमलों को सफलतापूर्वक ब्लॉक किया। इनमें 34 लाख बैकडोर अटैक, 24 लाख पासवर्ड चोरी के प्रयास और 2.5 लाख रैंसमवेयर हमले शामिल थे।
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क्या होता है ‘एडवांस्ड पर्सिस्टेंट थ्रेट’ (APT) हमला?
सामान्य साइबर हमलों के विपरीत, APT में हमलावर किसी नेटवर्क में अनधिकृत रूप से प्रवेश करने के बाद तुरंत तबाही मचाने के बजाय महीनों तक चुपचाप छिपे रहते हैं। इस दौरान वे संवेदनशील डेटा चुराते हैं, सिस्टम की जासूसी करते हैं या किसी बड़े भावी हमले की नींव रखते हैं। कैस्परस्की के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में दुनिया भर में हुई गंभीर साइबर घटनाओं में सर्वाधिक 24 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले APT हमलों की ही थी, जबकि सोशल इंजीनियरिंग 15 प्रतिशत और सामान्य मैलवेयर 12 प्रतिशत पर रहे।
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भरोसेमंद और ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर भी बने हमले का जरिया
साइबर अपराधियों ने अब वैध और सुरक्षित माने जाने वाले सॉफ्टवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर में ही सेंध लगाना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट में उल्लेख है कि मुंबई स्थित ‘eScan’ सुरक्षा सॉफ्टवेयर के अपडेट इंफ्रास्ट्रक्चर का दुरुपयोग मैलवेयर फैलाने के लिए किया गया। इसी तरह Notepad++ और Daemon Tools की आधिकारिक वेबसाइटों के जरिए सप्लाई-चेन हमले अंजाम दिए गए। इसके अलावा, ओपन-सोर्स पैकेज में खतरनाक कोड मिलाने के मामलों में 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसमें लोकप्रिय JavaScript लाइब्रेरी ‘Axios’ के मेंटेनर अकाउंट से छेड़छाड़ कर मैलवेयर फैलाना शामिल है।
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भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह चेतावनी?
भारत में डिजिटल भुगतान, क्लाउड सेवाओं, एआई और ऑनलाइन सरकारी सुविधाओं का दायरा जिस तेजी से बढ़ रहा है, उससे एक बहुत बड़ा ‘डिजिटल अटैक सरफेस’ तैयार हो चुका है। कैस्परस्की के विशेषज्ञों के अनुसार, अब साइबर सुरक्षा का दायरा केवल एंटीवायरस डाउनलोड करने या पासवर्ड बदलने तक सीमित नहीं रह गया है। भारतीय संस्थानों और कंपनियों को अपने पूरे सप्लाई-चेन, थर्ड-पार्टी सेवाओं और अपडेट इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा का नए सिरे से गहन मूल्यांकन करना होगा।

