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रांची: झारखंड आंदोलन के महानायक और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को भारत सरकार मरणोपरांत पद्मभूषण से सम्मानित करेगी। यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें लोक कल्याण और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाएगा।
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आदिवासी अधिकारों की लंबी लड़ाई
शिबू सोरेन ने अपने राजनीतिक जीवन में आदिवासी अधिकारों, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और सामाजिक न्याय के लिए निरंतर संघर्ष किया। उनके योगदान को देखते हुए केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया है, जिसे न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है।
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नेताओं और परिवार का प्रतिक्रिया
उनके बेटे और जेएमएम विधायक बसंत सोरेन ने कहा, “मैं केंद्र सरकार का धन्यवाद करता हूं। सरकार को उन्हें भारत रत्न से भी सम्मानित करने पर विचार करना चाहिए।”
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जेएमएम सांसद महुआ माजी ने कहा, “दिशोम गुरु शिबू सोरेन का कद इतना ऊंचा था कि उनसे बड़ा कोई सम्मान नहीं है। हमने उनके लिए भारत रत्न की मांग की थी। पद्मभूषण के लिए चयनित होने पर हम शुक्रगुजार हैं, लेकिन दिल में थोड़ी निराशा है।”
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झारखंड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा, “शिबू सोरेन को पद्मभूषण मिला, लेकिन देश और दुनिया के लोग उन्हें भारत रत्न के रूप में देखते हैं।” वहीं, जेएमएम केंद्रीय महासचिव बिनोद पाण्डेय ने कहा कि शिबू सोरेन भारत रत्न के हकदार हैं और उन्हें यह सम्मान मिलना चाहिए।
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स्थानीय नेताओं का समर्थन
खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड उप प्रमुख अरुण साबू ने कहा, “शिबू सोरेन न केवल भारत बल्कि अन्य देशों के आदिवासियों में भी लोकप्रिय नेता रहे हैं। उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए।”
शिबू सोरेन के योगदान और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए किए गए उनके संघर्ष को यह पद्मभूषण सम्मान नई पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनाता है।

