त्योहारों से पहले सस्ता होगा खाने का तेल? IVPA ने कंपनियों से की कीमत घटाने की अपील, सरकार रखेगी नजर
रायपुर, 6 अक्टूबर 2026। स्कूल में बच्चे क्या खा रहे हैं, उसमें कितनी शक्कर, नमक और कैलोरी है और कौन सा भोजन उनके स्वास्थ्य के लिए बेहतर है—अब इन सवालों को लेकर स्कूलों में जागरूकता बढ़ाने की तैयारी है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्चों को मोटापे, कुपोषण और कम उम्र में मधुमेह जैसी समस्याओं से बचाने के लिए प्रदेश के शासकीय, निजी और आवासीय विद्यालयों में शुगर एवं कैलोरी बोर्ड लगाने की अनुशंसा की है।
गांवों में अब सिर्फ मजदूरी नहीं, बनेंगी स्थायी सुविधाएं; 375 कामों की नई लिस्ट जारी
इस पहल का उद्देश्य केवल बच्चों को जंक फूड से दूर करना नहीं, बल्कि उन्हें खुद सही भोजन चुनने के लिए जागरूक करना है। प्रस्तावित बोर्ड पर खाद्य पदार्थों में मौजूद शर्करा, नमक, वसा और कैलोरी की जानकारी सरल तरीके से प्रदर्शित की जाएगी।
क्लास 6 से 8 के विज्ञान शिक्षकों के लिए NCERT का नया डिप्लोमा कोर्स, आधुनिक तरीकों से पढ़ाना होगा आसान
ट्रैफिक लाइट बताएगी खाने का सही चुनाव
आयोग की अनुशंसा के अनुसार बोर्ड में लाल, पीले और हरे रंग का प्रयोग किया जाएगा। लाल रंग अधिक शक्कर, नमक, वसा या कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों के लिए चेतावनी देगा। पीला रंग सीमित मात्रा में सेवन का संकेत होगा, जबकि हरा रंग पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक भोजन की पहचान कराएगा।
इस व्यवस्था से बच्चों को किसी खाद्य पदार्थ की पूरी जानकारी पढ़ने के बजाय रंगों के माध्यम से यह समझने में आसानी होगी कि उन्हें क्या खाना चाहिए और किस चीज से दूरी बनानी चाहिए।
रायगढ़ में दो बड़े अपराधों का खुलासा: चाकू से हमला कर लूट और शेयर बाजार में 70.77 लाख की ठगी, आरोपी गिरफ्तार
जंक फूड के बढ़ते चलन ने बढ़ाई चिंता
आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के अनुसार बच्चों में जंक फूड, अत्यधिक मीठे पेय पदार्थ और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ रहा है। ऐसे खानपान का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है और मोटापा, कुपोषण तथा कम उम्र में मधुमेह जैसी समस्याओं को लेकर चिंता बढ़ी है।
आयोग का मानना है कि केवल जंक फूड पर रोक लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों को भी रोजमर्रा के खानपान में बदलाव के लिए जागरूक करना जरूरी है।
CG High Court का फैसला: पंचायत कर्मचारियों की पेंशन याचिका खारिज, सरकारी कर्मचारियों के समान लाभ का दावा नहीं माना
आश्रम शाला से लेकर एकलव्य विद्यालय तक लागू करने की तैयारी
यह पहल केवल सामान्य स्कूलों तक सीमित नहीं रखने की अनुशंसा की गई है। आश्रम शालाओं, छात्रावासों, पोटा केबिन, प्रयास विद्यालयों और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में भी भोजन सारणी के पास ऐसे बोर्ड लगाने का सुझाव दिया गया है।
साथ ही स्थानीय और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भोजन में प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है।
सलमान खान को दिल्ली हाई कोर्ट का नोटिस, ‘काला हिरण’ फिल्म रिलीज विवाद में मांगा जवाब
स्कूलों में जंक फूड पर नियंत्रण, बनेंगे स्वास्थ्य दूत
आयोग ने स्कूल परिसरों में जंक फूड की बिक्री को नियंत्रित करने, ईट राइट क्लब बनाने और विद्यार्थियों को स्वास्थ्य दूत के रूप में तैयार करने की भी अनुशंसा की है। प्रार्थना सभाओं में पोषण और स्वस्थ खानपान को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया गया है।
OBC आरक्षण की मांग को लेकर झारखंड के 7 जिलों में बंद, गुमला में सड़कों पर उतरे लोग
अभिभावकों की भी होगी भूमिका
बच्चों के खानपान में सुधार के लिए शिक्षक-पालक बैठकों में संतुलित आहार पर चर्चा करने की बात कही गई है। बेहतर पोषण के लिए प्रयास करने वाले अभिभावकों को ‘पेरेंट्स ऑफ द मंथ’ के रूप में प्रोत्साहित करने की अनुशंसा भी की गई है।
छत्तीसगढ़ में बंपर सरकारी भर्ती: समूह-2 के तहत सहायक ग्रेड-3 सहित विभिन्न पदों पर भर्ती का ऐलान; 10 जनवरी 2027 को होगी लिखित परीक्षा
नई पहल का मूल संदेश
स्कूल की दीवार पर लगा एक बोर्ड बच्चों को यह सिखाएगा कि स्वाद के साथ सेहत का चुनाव कैसे किया जाए। आयोग की यह पहल लागू होती है तो स्कूल केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों में स्वस्थ जीवनशैली विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी बन सकते हैं।
दशहरा की 5 दिन की छुट्टी: 17 से 21 अक्टूबर तक बंद रहेंगे सभी सरकारी व प्राइवेट स्कूल

