नई दिल्ली: उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग नियमों में किए गए बड़े संशोधन के बाद, 1 सितंबर से देश भर में खाद्य तेलों के गैर-मानक पैकेट्स की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अब कंपनियां 1 लीटर या 1 किलो के स्थान पर 800 ग्राम, 900 ग्राम या 910 ग्राम जैसे गुमराह करने वाले पैक साइज बाजार में नहीं उतार सकेंगी।
कंपनियों को अपना पुराना स्टॉक निकालने के लिए दिया गया 3 महीने का समय 31 अगस्त को समाप्त हो चुका है। इसके साथ ही, देश में बिकने वाले घरेलू और आयातित दोनों प्रकार के प्रमुख खाद्य तेलों पर यह नया नियम अनिवार्य रूप से लागू हो गया है।
तय किए गए 9 मानक आकार
नए नियमों के तहत, खाद्य तेल अब केवल तय किए गए पैमानों पर ही बेचे जा सकेंगे। हालांकि, कमजोर आय वर्ग और सिंगल उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए 200 मिलीलीटर या 200 ग्राम से छोटे किफायती पाउच और कुछ विशेष तेलों को इस अनिवार्यता से छूट दी गई है:
- मीडियम पैकेट व बोतलें: 1 लीटर, 2 लीटर, 3 लीटर, 4 लीटर और 5 लीटर।
- बड़े पैकेट व टिन: 15 लीटर और 15 किलोग्राम, तथा 20 लीटर और 20 किलोग्राम के मानक टिन।
कीमतों और पारदर्शिता पर असर
- कीमतों में तकनीकी बदलाव संभव: उद्योग सूत्रों के अनुसार, पैकेजिंग साइज बदलने से खुदरा कीमतों में तकनीकी री-एडजस्टमेंट देखने को मिल सकता है। 800 या 900 ग्राम के पैकेट हटने और पूरे 1 लीटर के मानक पैक आने पर खुदरा स्तर पर प्रति पैकेट दाम बढ़ सकते हैं।
- मूल्यों की तुलना होगी आसान: पहले कम वजन (जैसे 800-900 ग्राम) के पैकेट 10 से 15 रुपये सस्ते लगते थे, लेकिन प्रति लीटर के हिसाब से उपभोक्ता असल में ज्यादा कीमत चुका रहे होते थे। अब मानक आकार तय होने से दो अलग-अलग ब्रांडों के बीच सही मूल्य की तुलना करना आसान होगा।
- मात्रा के साथ वजन लिखना अनिवार्य: सरकार ने तकनीकी पेंच को सुलझाते हुए निर्देश दिया है कि यदि पैकेट पर मात्रा लीटर या मिलीलीटर में है, तो उसके साथ उसका सटीक समतुल्य वजन (ग्राम या किलोग्राम में) भी लिखना अनिवार्य होगा। इससे घनत्व के नाम पर होने वाली घटतौली खत्म होगी।
- उपभोक्ताओं को गुमराह होने से बचाने और बाजार में पूरी पारदर्शिता लाने के लिए यह कदम उठाया गया है, जिससे अब ग्राहकों को सही माप और वजन में खाद्य तेल मिल सकेगा।























