Manoj Kumar Passes Away : : भारत कुमार मनोज कुमार का निधन: भारतीय सिनेमा ने खोया अपना सच्चा सपूत

Faizan Ashraf
Updated At: 04 Apr 2025 at 09:35 AM
देशभक्ति को परदे पर जीने वाले और भारतीय सिनेमा को राष्ट्रप्रेम से सराबोर करने वाले दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार अब हमारे बीच नहीं रहे। शुक्रवार सुबह लगभग 4 बजे, 87 वर्ष की आयु में उन्होंने कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।
मनोज कुमार के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन शुक्रवार दोपहर बाद मुंबई के जुहू स्थित विशाल टॉवर में किए जा सकेंगे। शनिवार सुबह जुहू के पवन हंस श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
‘भारत कुमार’ के नाम से प्रसिद्ध
24 जुलाई, 1937 को पंजाब के अमृतसर में जन्मे मनोज कुमार का असली नाम हरिकृष्ण गोस्वामी था। लेकिन जब उन्होंने फिल्म 'उपकार' बनाई और उसमें भारत मां के सच्चे सपूत की भूमिका निभाई, तो देश ने उन्हें ‘भारत कुमार’ की उपाधि दे दी। ‘शहीद’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘क्रांति’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ जैसी अनगिनत फिल्मों के ज़रिए उन्होंने भारतीय संस्कृति, अस्मिता और एकता का अलख जगाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'एक्स' पर शोक प्रकट करते हुए लिखा,
“मनोज कुमार जी भारतीय सिनेमा के प्रतीक थे। उनकी फिल्मों ने राष्ट्रीय गौरव की भावना को जाग्रत किया। वे सदा याद किए जाएंगे। यह देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। ओम शांति।”
अभिनय से निर्देशन तक, एक प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व
मनोज कुमार न सिर्फ बेहतरीन अभिनेता थे बल्कि एक संवेदनशील निर्देशक और कहानीकार भी थे। देशभक्ति उनकी आत्मा में बसती थी, जिसे उन्होंने सिनेमा के माध्यम से घर-घर पहुंचाया। उन्होंने अपने करियर में एक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, सात फिल्मफेयर पुरस्कार और 1992 में पद्म श्री प्राप्त किया। 2015 में उन्हें भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान, दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाज़ा गया।
इंडस्ट्री ने कहा अलविदा, दिल से
फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने कहा,
“मनोज जी जैसे महान निर्माता और आत्मा हमारे इंडस्ट्री में फिर नहीं होंगे। वे जीवन से भरे रहते थे, उनकी मुस्कान, उनका सादगी भरा स्वभाव और फिल्मों के प्रति जुनून आज भी प्रेरणा है। यह बहुत बड़ी क्षति है।”
एक युग का अंत
मनोज कुमार का जाना सिर्फ एक अभिनेता का नहीं, बल्कि एक युग का अंत है। उन्होंने देशभक्ति को सिनेमा के ज़रिए आत्मा दी और भारतीयता को गर्व से सिर उठाकर जीना सिखाया।
आज जब ‘भारत माता की जय’ गूंजती है, उसमें कहीं न कहीं मनोज कुमार की वो गूंज भी शामिल होती है, जो उनकी फिल्मों में थी।
अलविदा भारत कुमार, आपका कृतित्व अमर रहेगा।
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