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जशपुरनगर

जशपुर वनमण्डल में हाथियों और इंसानों के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए वन विभाग ने अब तकनीक का सहारा लिया है। ‘गजराज’ की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभाग ने ड्रोन सर्विलांस की शुरुआत की है। इस आधुनिक पहल के तहत जशपुर वनमण्डल के मैदानी अमले और रैपिड रिस्पॉन्स टीम (RRT) को अत्याधुनिक ड्रोन संचालन का विशेष प्रशिक्षण देकर तैयार किया गया है।

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तीन चरणों में ‘हाई-टेक’ हुआ वन अमला वनमण्डलाधिकारी (DFO) शशि कुमार के मार्गदर्शन में हाथियों की सटीक ट्रैकिंग के लिए जिले के विभिन्न उपवनमण्डलों में चरणबद्ध प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए गए।पत्थलगांव उपवनमण्डल में 24 जनवरी को नारायणपुर में कर्मियों को तकनीक से जोड़ा गया।कुनकुरी उपवनमण्डल में 25 जनवरी को कुनकुरी में प्रशिक्षण संपन्न हुआ।

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जशपुर उपवनमण्डल में 27 जनवरी को मनोरा में वन अमले को ड्रोन की बारीकियां सिखाई गईं।

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दुर्गम रास्तों और अंधेरे में भी नहीं बचेंगे हाथी ड्रोन तकनीक के आने से अब घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों में भी हाथियों की सटीक लोकेशन प्राप्त करना संभव होगा। प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को रियल-टाइम लोकेशन ट्रैकिंग, नाइट विजन सर्वे (रात्रिकालीन सर्वेक्षण) और मूवमेंट मॉनिटरिंग का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया।

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इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि आपात स्थिति में वन विभाग बिना हाथियों के करीब जाए, सुरक्षित दूरी से उनकी स्थिति जानकर ग्रामीणों को अलर्ट कर सकेगा।

जशपुर में 40 हाथियों की मौजूदगी: रात भर जाग रही है गश्ती टीम वर्तमान में जशपुर वनमण्डल के अलग-अलग क्षेत्रों में कुल 40 हाथियों का दल विचरण कर रहा है। इन हाथियों की निगरानी के लिए गश्ती टीमें हर रात मुस्तैदी से डटी हुई हैं। ड्रोन के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी RRT के सदस्य पल-पल की रिपोर्ट हेडक्वार्टर को भेज रहे हैं। हाथियों के व्यवहार और उनके रूट की निरंतर समीक्षा की जा रही है ताकि किसी भी तरह की जन-धन की हानि को टाला जा सके।

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ग्रामीणों से अपील वन विभाग ने संभावित संवेदनशील गांवों में मुनादी और मोबाइल संदेशों के माध्यम से जागरूकता अभियान तेज कर दिया है। डीएफओ शशि कुमार ने ग्रामीणों से विशेष अपील की है कि हाथियों के पास जाने या सेल्फी लेने की कोशिश बिल्कुल न करें। रात के समय जंगलों या सुनसान रास्तों पर अनावश्यक आवागमन से बचें। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल वन विभाग या आर.आर.टी. (RRT) को सूचित करें।

 

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जशपुर वन विभाग की यह ‘ड्रोन पहल’ वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच एक नया सेतु तैयार करेगी। तकनीक के इस मेल से न केवल इंसानों की जान बचेगी, बल्कि हाथियों के सुरक्षित गलियारे को भी संरक्षित किया जा सकेगा।

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