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छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर रोक लगाने वाले धर्म स्वतंत्रता विधेयक को अंतिम रूप देने की दिशा में सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम बढ़ाया है। गुरुवार को मंत्रालय में मंत्रिमंडलीय उप-समिति की पहली बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रस्तावित विधेयक के संवैधानिक, कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर गहन मंथन हुआ। बैठक का उद्देश्य विधेयक को ऐसा मजबूत स्वरूप देना है, जो न केवल प्रभावी हो बल्कि किसी भी न्यायिक चुनौती के सामने टिक सके।
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बैठक में गृह मंत्री विजय शर्मा, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, वन मंत्री केदार कश्यप, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी और विधि मंत्री गजेन्द्र यादव शामिल हुए। मंत्रियों ने एकमत से स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसी विशेष धर्म के विरुद्ध नहीं है, बल्कि सभी धर्मों की स्वतंत्रता, सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लाया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट मत है कि प्रत्येक धर्म को अपने प्रचार-प्रसार का अधिकार है, लेकिन प्रलोभन, दबाव, धमकी या किसी भी अनुचित माध्यम से धर्मांतरण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि धर्मांतरण से जुड़े कानूनों को अक्सर अदालतों में चुनौती दी जाती है, इसलिए विधेयक को पूरी तरह संवैधानिक दायरे में रखते हुए तर्कसंगत और मजबूत बनाया जाना जरूरी है। इसी क्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक, संवैधानिक और धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां सभी धर्मों को समान अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाकर या लोभ और जबरदस्ती से धर्म परिवर्तन कराना स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ समिति ने विधेयक के हर पहलू पर विस्तार से विचार किया है।
मंत्रिमंडलीय उप-समिति ने यह भी साफ किया कि विधेयक को तैयार करने में किसी तरह की जल्दबाजी नहीं की जाएगी। अन्य राज्यों में लागू समान कानूनों पर आई कानूनी चुनौतियों का अध्ययन कर, उनसे सबक लेते हुए हर बिंदु पर सावधानीपूर्वक निर्णय लिया जा रहा है। यह समिति की पहली बैठक थी और आने वाले समय में इस विषय पर कई और बैठकें आयोजित की जाएंगी।
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सूत्रों के अनुसार, धर्म स्वतंत्रता विधेयक को विधानसभा के आगामी बजट सत्र, फरवरी–मार्च 2026 में पेश करने की तैयारी है। एक अंतिम बैठक के बाद विधेयक को अंतिम रूप दिया जाएगा। सरकार का दावा है कि यह कानून संवैधानिक रूप से मजबूत होगा और अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी रोक लगाने में सहायक सिद्ध होगा।
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गौरतलब है कि यह कदम राज्य में हाल के वर्षों में धर्मांतरण को लेकर सामने आए आरोपों, विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों से जुड़ी शिकायतों के मद्देनजर उठाया गया है। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित विधेयक सभी धर्मों की समान सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और समाज में सद्भाव व सौहार्द बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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