चीनी की रिकॉर्ड कीमतों के बीच अब घरेलू बाजार में दालों की कीमतों को लेकर चिंताएं गहराने लगी हैं। देश में खरीफ सीजन के दौरान दलहन फसलों की बुवाई के रकबे में आई गिरावट, दालों के आयात में कमी और मौसम के संभावित असर (अल-नीनो) ने त्योहारी सीजन से पहले आपूर्ति पर दबाव बढ़ा दिया है। हालांकि, स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने बफर स्टॉक के जरिए बाजार में दखल देने की तैयारी की है।
आयात के आंकड़ों में गिरावट
वर्ष 2026 के पहले छह महीनों (जनवरी से जून) के दौरान देश में दालों का कुल आयात 31.80 लाख टन रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि (32.27 लाख टन) की तुलना में 1.46 फीसदी कम है।
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तुअर (अरहर) आयात: छह महीनों में कुल 5.05 लाख टन तुअर का आयात हुआ।
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प्रमुख निर्यातक देश: मोजाम्बिक (1.83 लाख टन से अधिक), म्यांमार (1.23 लाख टन), तंजानिया (1.01 लाख टन) और सूडान (49,049 टन)।
खरीफ सीजन में घटा बुवाई का रकबा
कृषि मंत्रालय के 14 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार, चालू सीजन में दलहन फसलों का कुल रकबा 108.14 लाख हेक्टेयर रहा है, जो पिछले साल (108.49 लाख हेक्टेयर) की तुलना में करीब 35 हजार हेक्टेयर कम है।
| फसल | वर्तमान रकबा (2026) | पिछले वर्ष का रकबा | रकबे में कमी |
| अरहर (तुअर) | 40.31 लाख हेक्टेयर | 42.01 लाख हेक्टेयर | 1.69 लाख हेक्टेयर |
| मूंग | 32.05 लाख हेक्टेयर | 33.42 लाख हेक्टेयर | 1.37 लाख हेक्टेयर |
| अन्य दालें | 3.14 लाख हेक्टेयर | 3.41 लाख हेक्टेयर | 27 हजार हेक्टेयर |
अल-नीनो और सूखे की आशंका से पैदावार पर खतरा
दलहन फसलों के विकास के मध्य चरण में पर्याप्त बारिश की आवश्यकता होती है। मौसम पूर्वानुमानों के अनुसार, अगस्त के अंत से सितंबर के दौरान अल-नीनो के मजबूत होने के संकेत हैं, जिससे 70 फीसदी तक सूखे की स्थिति बन सकती है। यदि बारिश का पैटर्न प्रभावित होता है, तो कम रकबे के साथ-साथ प्रति हेक्टेयर उत्पादकता घटने का दोहरा झटका लग सकता है।
सरकार की तैयारी: 30 लाख टन का बफर स्टॉक
बाजार में संभावित मूल्य वृद्धि और कृत्रिम कमी से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने करीब 30 लाख टन दालों का रणनीतिक बफर स्टॉक तैयार रखा है। इसमें अरहर, उड़द, मूंग, चना और मसूर शामिल हैं। सरकार का कहना है कि कीमतों में असामान्य तेजी आने की स्थिति में इस भंडार से चरणबद्ध तरीके से दालों को खुले बाजार में जारी किया जाएगा ताकि आगामी त्योहारों (गणेश चतुर्थी, दशहरा, दिवाली) पर आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।























