राजनांदगांव जिले में जमीन-जायदाद से जुड़े राजस्व मामलों के निपटारे की रफ्तार में बड़ा सुधार दर्ज किया गया है। खासतौर पर विवादित नामांतरण और खाता विभाजन जैसे मामलों में पिछले साल की तुलना में निराकरण दर काफी बढ़ी है। जिला प्रशासन ने इन प्रकरणों की विशेष मॉनिटरिंग के साथ गांव और पंचायत स्तर पर राजस्व शिविर लगाए, नियमित सुनवाई की और पंचायत अमले को भी प्रक्रिया से जोड़ा। इसका असर अब आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है।
राजस्व वर्ष 2026 में विवादित नामांतरण के मामलों की निराकरण दर 94.82 प्रतिशत पहुंच गई, जबकि वर्ष 2025 में यह 68.49 प्रतिशत थी। इसी तरह विवादित खाता विभाजन के मामलों में निराकरण दर 72.53 प्रतिशत से बढ़कर 95.70 प्रतिशत हो गई। यानी दोनों महत्वपूर्ण सेवाओं में एक साल के भीतर निराकरण दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
37 हजार से ज्यादा प्रकरण दर्ज, करीब 35 हजार का निराकरण
1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक राजनांदगांव जिले में कुल 37,306 राजस्व प्रकरण दर्ज हुए। इनमें से 34,939 मामलों का निराकरण किया गया, जबकि 2,367 प्रकरण लंबित हैं। इस तरह कुल निराकरण दर 93.66 प्रतिशत रही।
इस दौरान अविवादित नामांतरण के 25,150 मामलों में से 23,343 का निराकरण हुआ। अविवादित खाता विभाजन के 3,254 मामलों में से 3,062 मामलों का निपटारा किया गया। वहीं विवादित नामांतरण के 2,241 मामलों में से 2,125 और विवादित खाता विभाजन के 768 मामलों में से 735 का निराकरण किया गया।
सीमांकन के 2,333 मामलों में से 2,331 का निराकरण हुआ। व्यपवर्तन के 1,632 मामलों में से 1,591 मामलों का निपटारा किया गया। वृक्ष कटाई की अनुमति से जुड़े सभी 51 मामलों का निराकरण किया गया। भू-अभिलेख प्रविष्टि सुधार के 1,877 मामलों में से 1,701 प्रकरणों का भी निराकरण किया गया।
पंचायत स्तर पर भी हुआ तेजी से काम
राजस्व मामलों के निराकरण में पंचायत अमले की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही। वर्ष 2026 में पंचायत अमले के माध्यम से कुल 15,496 प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें से 14,694 का निराकरण किया गया। पंचायत स्तर पर कुल निराकरण दर 94.82 प्रतिशत रही।
पंचायत अमले द्वारा अविवादित नामांतरण के 12,629 मामलों में से 11,887 और अविवादित खाता विभाजन के 2,867 मामलों में से 2,807 का निराकरण किया गया। गांव के नजदीक शिविर लगने से ग्रामीणों को तहसील और जिला कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने से भी राहत मिली।
शिविर और मॉनिटरिंग से मिली मामलों को गति
जिला प्रशासन ने विवादित राजस्व प्रकरणों के लिए विशेष शिविर और नियमित सुनवाई आयोजित की। तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारियों के साथ सरपंच एवं पंचायत सचिवों के समन्वय से मामलों को आगे बढ़ाया गया।
समय-सीमा की बैठकों में लंबित और विवादित मामलों की नियमित समीक्षा की गई। जरूरत के अनुसार कलेक्टर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। प्रशासन का कहना है कि मैदानी अमले की सक्रियता और पंचायत स्तर पर समन्वय से राजस्व सेवाओं के निराकरण में तेजी आई है।
कलेक्टर ने कहा- जटिल मामलों का समय पर निराकरण प्राथमिकता
कलेक्टर ने कहा कि राजस्व वर्ष 2026 में विवादित नामांतरण और खाता विभाजन जैसे जटिल मामलों का त्वरित निराकरण प्राथमिकता में रहा। विवादित नामांतरण की निराकरण दर 68.49 प्रतिशत से बढ़कर 94.82 प्रतिशत और विवादित खाता विभाजन की दर 72.53 प्रतिशत से बढ़कर 95.70 प्रतिशत होना राजस्व और पंचायत अमले की सक्रियता का परिणाम है।
जिला प्रशासन के मुताबिक आगे भी राजस्व सेवाओं को सरल, सुलभ, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के साथ गांव एवं पंचायत स्तर पर अधिक से अधिक सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
























