रायपुर। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र राठौर ने प्रदेश के सभी शिक्षक संगठनों एवं प्राथमिक-माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों से शिक्षक हित के मुद्दों पर एकजुट होकर संघर्ष करने की भावपूर्ण अपील की है। उन्होंने कहा कि यह समय किसी संगठन को बड़ा या छोटा साबित करने का नहीं, बल्कि शिक्षक समाज के सम्मान, अधिकार और भविष्य की रक्षा के लिए साझा मंच पर आने का है।
राठौर ने कहा कि आज प्रदेश के लगभग 77 हजार शिक्षक टीईटी अनिवार्यता, पूर्व सेवा की गणना, वेतन संबंधी विसंगतियों तथा अन्य महत्वपूर्ण समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ये किसी एक संगठन के नहीं, बल्कि पूरे शिक्षक समाज के मुद्दे हैं। इसलिए इन पर संघर्ष भी सामूहिक होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में अनेक शिक्षक संगठन वर्षों से अपने-अपने स्तर पर शिक्षक हित में कार्य कर रहे हैं और सभी का उद्देश्य शिक्षकों का सम्मान एवं अधिकार सुरक्षित करना है। ऐसे में यदि सभी संगठन इन साझा मुद्दों पर मतभेद भुलाकर एक मंच पर आएं, तो शिक्षक समाज की आवाज कहीं अधिक प्रभावी होगी।
राठौर ने कहा कि यदि किसी कारणवश संगठनात्मक स्तर पर पूर्ण एकता अभी संभव नहीं हो पा रही है, तब भी प्रत्येक शिक्षक का नैतिक दायित्व है कि वह शिक्षक हित के प्रश्नों पर एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करे। अधिकारों की लड़ाई संगठन देखकर नहीं, बल्कि मुद्दों की गंभीरता देखकर लड़ी जाती है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन पिछले छह वर्षों से टीईटी अनिवार्यता, पूर्व सेवा की गणना, वेतन विसंगति सहित अनेक शिक्षक हितैषी मांगों को शासन एवं न्यायालय तक लगातार उठाता रहा है। यह संघर्ष किसी संगठन विशेष का नहीं, बल्कि प्रत्येक शिक्षक के भविष्य और सम्मान का संघर्ष है।
प्रदेश अध्यक्ष ने सभी शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों से भी सकारात्मक पहल करने का आग्रह करते हुए कहा कि यदि हम शिक्षक समाज के व्यापक हित को सर्वोपरि रखकर साझा रणनीति बनाएंगे, तो सरकार के समक्ष हमारी बात अधिक मजबूती से पहुंचेगी। आज आवश्यकता प्रतिस्पर्धा की नहीं, बल्कि समन्वय और सहयोग की है।
अंत में रविन्द्र राठौर ने कहा— “मैं किसी संगठन का विरोध नहीं कर रहा हूं और न ही किसी शिक्षक से अपना संगठन छोड़ने की अपील कर रहा हूं। मेरी केवल इतनी विनम्र प्रार्थना है कि शिक्षक हित के मुद्दों पर हम सब एक साथ खड़े हों। संगठन अलग-अलग रह सकते हैं, लेकिन शिक्षक समाज की लड़ाई एक होनी चाहिए। जब हम एकजुट होंगे, तभी न्याय, सम्मान और अधिकार की हमारी आवाज़ को अनदेखा करना किसी के लिए संभव नहीं होगा।”
उन्होंने प्रदेश के सभी शिक्षकों से आह्वान किया कि संघवाद से ऊपर उठकर शिक्षक एकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और जो भी संगठन ईमानदारी से शिक्षक हित की लड़ाई लड़ रहा हो, उसका सहयोग करते हुए साझा संघर्ष को मजबूत बनाएं। यही एकता आने वाले समय में शिक्षक समाज के अधिकारों और सम्मान की सबसे बड़ी शक्ति बनेगी।

