नई दिल्ली। भारत में जल्द ही प्लास्टिक यानी पॉलिमर नोटों का ट्रायल शुरू होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के उस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है, जिसके तहत 10 और 20 रुपये के पॉलिमर नोटों को सीमित स्तर पर चलाकर देखा जाएगा। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत दोनों मूल्यवर्ग के 1-1 अरब नोट छापे और इस्तेमाल में लाए जाएंगे।
भारतीय मौसम और मजबूती की होगी जांच
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि RBI के केंद्रीय बोर्ड के प्रस्ताव को सरकार ने मंजूरी दे दी है। इस ट्रायल का मुख्य उद्देश्य यह जांचना है कि भारत के अलग-अलग मौसम, गर्मी, नमी, धूल और रोजमर्रा के उपयोग में पॉलिमर नोट कितने टिकाऊ साबित होते हैं। ये नए नोट मौजूदा कागजी नोटों के साथ ही बाजार में उतारे जाएंगे। फिलहाल इन नोटों के बाजार में आने की कोई निश्चित तारीख तय नहीं हुई है।
कम मूल्य के नोट जल्दी होते हैं खराब
RBI के मुताबिक, कम मूल्य वाले नोट सबसे ज्यादा हाथ बदलते हैं, जिससे वे जल्दी गंदे और फट जाते हैं। पॉलिमर नोट नमी, पानी और फटने के मामले में कागजी नोटों की तुलना में काफी मजबूत होते हैं। इनमें नकली नोटों पर रोक लगाने के लिए माइक्रो-ऑप्टिक होलोग्राम और पारदर्शी विंडो जैसे आधुनिक सुरक्षा फीचर्स भी शामिल किए जा सकते हैं।
दुनिया के 60 देशों में हो रहा इस्तेमाल
पॉलिमर करेंसी का चलन दुनिया के करीब 60 देशों में है, जिसमें ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देश शामिल हैं। इन देशों में इनकी लंबी उम्र के कारण छोटे मूल्यवर्ग के नोटों को बार-बार बदलने की जरूरत कम पड़ती है। भारतीय परिस्थितियों में इस पायलट प्रोजेक्ट के सफल प्रदर्शन के बाद ही इन्हें बड़े पैमाने पर जारी करने का अंतिम फैसला लिया जाएगा।

