नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारियों के बीच 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की गतिविधियों में तेजी आ गई है। कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए आयोग की टीम देश के विभिन्न शहरों का दौरा कर कर्मचारी यूनियनों और प्रतिनिधियों से सुझाव जुटा रही है। इसी कड़ी में अक्टूबर महीने में आयोग की टीम बेंगलुरु और मुंबई में महत्वपूर्ण परामर्श बैठकें आयोजित करने जा रही है।
7-8 अक्टूबर को बेंगलुरु और 22-23 अक्टूबर को मुंबई में मंथन
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, वेतन आयोग की टीम सबसे पहले दक्षिण भारत का रुख करेगी। 7 और 8 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में कर्मचारी संगठनों के साथ चर्चा की जाएगी। इसके बाद आयोग की अगली उच्चस्तरीय बैठक 22 और 23 अक्टूबर को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में होगी। इन बैठकों में संबंधित क्षेत्रों के रेलवे, डाक, रक्षा और अन्य केंद्रीय विभागों के कर्मचारी प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है ताकि वे अपनी क्षेत्रीय और विभागीय मांगों को आयोग के समक्ष रख सकें।
फिटमेंट फैक्टर और सैलरी रिवीजन पर रहेगा मुख्य फोकस
मुंबई और बेंगलुरु में होने वाली इन बैठकों में कर्मचारी संगठनों की ओर से कई प्रमुख मुद्दे उठाए जाएंगे:
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फिटमेंट फैक्टर: न्यूनतम मूल वेतन तय करने के लिए फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाए जाने की मांग सबसे प्रमुख है।
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वेतन और पेंशन संशोधन: महंगाई और जीवन-यापन की मौजूदा लागत को ध्यान में रखते हुए वेतन और पेंशन में सम्मानजनक वृद्धि।
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भत्तों की समीक्षा: एचआरए (HRA), यात्रा भत्ता (TA) और अन्य भत्तों के फॉर्मूले में संशोधन।
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वरिष्ठ पेंशनरों की राहत: पेंशनभोगियों के लिए अतिरिक्त पेंशन लाभ और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर सुझाव।
सुझावों के आधार पर तैयार होगी अंतिम रिपोर्ट
आयोग का उद्देश्य देश के प्रमुख औद्योगिक और प्रशासनिक केंद्रों पर जाकर जमीनी स्तर के कर्मचारियों, अधिकारियों और पेंशनर्स एसोसिएशनों से सीधे संवाद स्थापित करना है। विभिन्न राज्यों और संघों से मिलने वाले इन ज्ञापनों व सुझावों के विस्तृत अध्ययन के बाद ही आयोग अपनी अंतिम सिफारिशों का मसौदा तैयार करेगा, जिसे बाद में केंद्र सरकार के समक्ष मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।























