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नई दिल्ली: भारत ने सड़क बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक ऐसी क्रांतिकारी उपलब्धि हासिल की है जिसने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CSIR-CRRI) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने मिलकर बेकार प्लास्टिक कचरे से ‘तकनीकी टेक्सटाइल जियोसेल’ तैयार कर पहली बार रोडब्लॉक सेक्शन का निर्माण किया है। इस नवाचार के लिए दोनों संस्थानों का नाम गर्व के साथ ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ और ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज किया गया है।
सीएसआईआर मुख्यालय में आयोजित एक भव्य समारोह में सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलाइसेल्वी की उपस्थिति में इस उपलब्धि का जश्न मनाया गया। यह तकनीक न केवल सड़कों को मजबूती प्रदान करेगी बल्कि देश के सामने खड़े प्लास्टिक कचरे के पहाड़ों का भी वैज्ञानिक समाधान पेश करेगी।
कचरे से कंचन बनाने वाली तकनीक
आमतौर पर प्लास्टिक कचरा पर्यावरण के लिए एक बड़ा बोझ माना जाता है, लेकिन इस विशेष तकनीक में इसे संसाधित कर ‘जियोसेल’ में बदल दिया गया है। ये जियोसेल सड़क निर्माण के दौरान मिट्टी और कंक्रीट को एक मजबूत ढांचा प्रदान करते हैं। सीआरआरआई के निदेशक डॉ. च. रवि शेखर के अनुसार यह पहल प्रधानमंत्री के ‘चक्रीय अर्थव्यवस्था’ (Circular Economy) के विजन को मजबूती देती है जहाँ कचरे को दोबारा मूल्यवान संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
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पर्यावरण और मजबूती का मेल
इस परियोजना में मुख्य वैज्ञानिक डॉ. अंबिका बहल और श्री गगनदीप सिंह की टीम ने यह सुनिश्चित किया कि प्लास्टिक से बनी यह सड़क न केवल पर्यावरण के अनुकूल हो, बल्कि इंजीनियरिंग के कड़े मानकों और टिकाऊपन की कसौटी पर भी खरी उतरे। व्यापक परीक्षणों के बाद यह पाया गया कि यह प्रणाली वास्तविक यातायात के भारी दबाव को झेलने में पूरी तरह सक्षम है।
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उद्योग और विज्ञान का सफल गठबंधन
बीपीसीएल के मुख्य प्रबंधक डॉ. महेश कस्तुरे और महाप्रबंधक डॉ. टी. चिरंजीवी ने इस सफलता को उद्योग और शिक्षा जगत के बीच एक बेहतरीन तालमेल बताया है। बीपीसीएल ने इसे अपने सतत विकास लक्ष्यों (SDG) का हिस्सा बनाया है, जो भविष्य में कार्बन उत्सर्जन कम करने और संसाधन दक्षता बढ़ाने में मददगार साबित होगा।
इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड की स्थापना ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब केवल समस्याओं पर चर्चा नहीं करता, बल्कि वैज्ञानिक नवाचार के माध्यम से उनके विश्व स्तरीय समाधान भी निकाल रहा है। अंत में डॉ. विनोद कुमार द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ इस गौरवशाली क्षण का समापन हुआ।

