नई दिल्ली | 18 अप्रैल 2026
संसद में महिला आरक्षण (131वां संविधान संशोधन) विधेयक गिरने के 24 घंटे बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित किया। प्रधानमंत्री का यह संबोधन पूरी तरह से देश की नारी शक्ति को समर्पित रहा। उन्होंने बेहद भावुक शब्दों में देश की महिलाओं से माफी मांगी और विपक्षी दलों—विशेषकर कांग्रेस, टीएमसी, सपा और डीएमके—पर तीखा प्रहार करते हुए उनके व्यवहार को ‘नारी शक्ति का अपमान’ करार दिया।
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“मैं क्षमा मांगता हूं” – प्रधानमंत्री की भावुक अपील
अपने संबोधन की शुरुआत में पीएम मोदी ने कहा, “आज मैं देश की माताओं, बहनों और बेटियों से बात करने आया हूं। हमारे भरसक प्रयासों के बावजूद हम सफल नहीं हो पाए। नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन नहीं हो पाया। इसके लिए मैं देश की सभी माताओं और बहनों से क्षमा मांगता हूं।”
विपक्ष पर ‘भ्रूण हत्या’ का आरोप और तीखा हमला
प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों की राजनीति को ‘स्वार्थी’ बताते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए: पीएम ने कहा कि कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके ने मिलकर इस बिल की ‘भ्रूण हत्या’ कर दी है।पीएम मोदी ने दुख जताते हुए कहा, “जब सदन में नारी हित का प्रस्ताव गिरा, तो परिवारवादी पार्टियां तालियां बजा रही थीं, मेजें थपथपा रही थीं। यह केवल टेबल पर थाप नहीं थी, बल्कि नारी के आत्मसम्मान पर चोट थी।” उन्होंने कहा कि जब कुछ लोगों के लिए दल का हित देश हित से बड़ा हो जाता है, तो उसका खामियाजा नारी शक्ति को भुगतना पड़ता है।
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“नारी अपमान कभी नहीं भूलती”
पीएम मोदी ने विपक्ष को आगाह करते हुए कहा कि 21वीं सदी की नारी अब ‘फॉर ग्रांटेड’ नहीं ली जा सकती। वह हर घटना को देख रही है। उन्होंने कहा, “नारी सब भूल सकती है, लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलती। संसद में विपक्ष के इस व्यवहार की कसक हर नारी के मन में रहेगी। इस पाप की सजा उन्हें जनता जरूर देगी।”
दक्षिणी राज्यों और परिसीमन पर स्पष्टीकरण
संबोधन से पहले कोयंबटूर की रैली का जिक्र करते हुए पीएम ने डीएमके (DMK) पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल तमिलनाडु की सीटों में कमी को लेकर ‘झूठा डर’ फैला रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि सरकार ने आनुपातिक प्रतिनिधित्व बनाए रखने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन विपक्ष ने यू-टर्न ले लिया।
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क्यों गिरा ऐतिहासिक बिल?
विधेयक को पारित करने के लिए 352 वोटों (दो-तिहाई बहुमत) की आवश्यकता थी। शुक्रवार रात हुई वोटिंग के आंकड़े इस प्रकार रहे:
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पक्ष में वोट: 298
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विपक्ष में वोट: 230
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कुल मतदान: 528
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नतीजा: सरकार लक्ष्य से 54 वोट पीछे रह गई और विधेयक गिर गया।
इस बिल के जरिए 2029 के चुनावों से पहले लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 (या 850) करने और महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रावधान था।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ये 7 प्रमुख संबोधन
1. 8 नवंबर 2016: नोटबंदी (Demonetisation)
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ऐलान: रात 12 बजे से ₹500 और ₹1000 के नोटों को अमान्य (लीगल टेंडर नहीं) घोषित कर दिया गया।
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उद्देश्य: काले धन पर लगाम, जाली नोटों का खात्मा और आतंकवाद की फंडिंग को रोकना।
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2. 8 अगस्त 2019: अनुच्छेद 370 का खात्मा
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ऐलान: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A हटाने के बाद देश को संबोधित किया।
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संदेश: “एक देश, एक संविधान” और कश्मीर के विकास के नए युग की शुरुआत।
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3. 19 मार्च 2020: जनता कर्फ्यू की अपील
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ऐलान: कोरोना महामारी के शुरुआती दौर में 22 मार्च को एक दिन के ‘जनता कर्फ्यू’ का आह्वान।
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उद्देश्य: कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में जनभागीदारी और सामाजिक एकजुटता का संदेश।
4. 24 मार्च 2020: पहला राष्ट्रीय लॉकडाउन
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ऐलान: 25 मार्च से 21 दिनों के लिए पूरे देश में पूर्ण लॉकडाउन लागू।
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मूल मंत्र: “जान है तो जहान है।” यह दुनिया का सबसे बड़ा लॉकडाउन था।
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5. 12 मई 2020: आत्मनिर्भर भारत अभियान
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ऐलान: कोविड संकट से उबरने के लिए ₹20 लाख करोड़ के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा।
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लक्ष्य: अर्थव्यवस्था को ‘स्वदेशी’ और ‘आत्मनिर्भरता’ की पटरी पर लाना।
6. 7 जून 2021: मुफ्त कोविड वैक्सीनेशन नीति
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ऐलान: 21 जून (योग दिवस) से देश के 18+ सभी नागरिकों को केंद्र सरकार द्वारा मुफ्त वैक्सीन लगाने की नीति।
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प्रभाव: दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान को गति मिली।
छत्तीसगढ़ के पलायन आंकड़ों में बड़ा विरोधाभास: जहाँ 21 जिले पूरी तरह पलायन मुक्त हो चुके हैं, वहीं कबीरधाम और मुंगेली में संकट गहराया है, जशपुर में 40% सुधार दर्ज, विस्तृत रिपोर्ट पढ़ें……….
7. 19 नवंबर 2021: कृषि कानूनों की वापसी
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ऐलान: गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला।
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संदेश: “हम अपनी तपस्या में कमी रह गई, किसानों के एक वर्ग को समझा नहीं पाए

