हसदेव-अरण्य क्षेत्र में स्थित तारा कोयला ब्लॉक की वाणिज्यिक नीलामी संपन्न होने के बाद राज्य में राजनीतिक और पर्यावरणीय विवाद खड़ा हो गया है। 15वें दौर की इस पारदर्शी प्रतिस्पर्धी नीलामी में 9 बोलियां प्राप्त हुईं, जिसके बाद यह ब्लॉक ‘सीजी सिन एंड गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड’ को मिला है। कांग्रेस ने इस नीलामी को अदाणी समूह से जोड़ते हुए इसे ‘पर्यावरण का विनाश’ करार दिया है। वहीं, विवाद पर छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (CMDC) ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि अभी केवल नीलामी प्रक्रिया पूरी हुई है; माइनिंग प्लान, वन एवं पर्यावरण स्वीकृति तथा सभी वैधानिक अनुमतियां मिले बिना क्षेत्र में न तो वास्तविक खनन शुरू होगा और न ही एक भी पेड़ काटा जाएगा।
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, राज्य सरकार ने 11 दिसंबर 2025 को अनुरोध कर तारा ब्लॉक को नीलामी सूची में शामिल कराया था, क्योंकि यह क्षेत्र लेमरू हाथी गलियारे की सीमा से बाहर है। CMDC ने रेखांकित किया कि नीलामी जीत लेने मात्र से किसी कंपनी को सीधे खनन या वन कटाई का अधिकार नहीं मिल जाता। यह ब्लॉक वर्ष 2011 में भी CMDC को आवंटित हुआ था, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट के सामूहिक फैसले के तहत निरस्त कर दिया गया था। उस दौर में भी प्रतिकूल अनुशंसाओं के बावजूद तत्कालीन व्यवस्था के तहत हसदेव क्षेत्र के तारा और पीईकेबी (परसा ईस्ट केते बासन) जैसे ब्लॉकों की स्वीकृतियां आगे बढ़ाई गई थीं।
निगम ने पूर्ववर्ती सरकारों के पत्राचारों का उल्लेख करते हुए बताया कि हसदेव में ऊर्जा जरूरतों को लेकर लगातार प्रक्रियाएं चलती रही हैं। वर्ष 2019 और 2021 में पत्राचार के अलावा मोरगा कोल ब्लॉक को CMDC के पक्ष में आवंटित करने के लिए भी केंद्र से आग्रह किया गया था, जिसमें पर्यावरण मंजूरी लेने की प्रतिबद्धता जताई गई थी। इसके अतिरिक्त, भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) के वैज्ञानिक अध्ययन में भी कड़े पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और संरक्षण शर्तों के अधीन तारा सहित कुछ ब्लॉकों को विचार योग्य पाया गया था।
राज्य में वन संरक्षण की स्थिति का हवाला देते हुए फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) रिपोर्ट का उल्लेख किया गया, जिसके मुताबिक 2021 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्राच्छादन में 683.62 वर्ग किमी की शुद्ध वृद्धि दर्ज हुई, जो देश में सर्वाधिक थी। CMDC ने दोहराया कि राज्य सरकार देश की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच कड़ा संतुलन बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और तय नियमों व प्रतिपूरक वनीकरण के बिना कोई जमीनी गतिविधि शुरू नहीं की जाएगी।























