उत्तर प्रदेश के वाराणसी में आयोजित दो दिवसीय ‘सहकार से समृद्धि’ राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन में सहकारिता क्षेत्र के पुनरुद्धार और इसे ग्रामीण विकास का मुख्य स्तंभ बनाने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर चर्चा की गई। केंद्रीय सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भुटानी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि अब समय केवल चर्चा का नहीं बल्कि परिणामों का है। उन्होंने जोर दिया कि केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से सहकारिता सुधारों को अब जिला स्तर पर समयबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। सचिव ने अमूल और सारस्वत सहकारी बैंक जैसे सफल संस्थानों के उदाहरण देते हुए इस क्षेत्र में नई ऊर्जा के संचार का आह्वान किया।
सम्मेलन के दौरान प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के कंप्यूटरीकरण और उनके विस्तार पर विशेष चर्चा की गई। सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक इस पूरी प्रक्रिया को टिकाऊ और आधुनिक बनाना है। इसके साथ ही, सहकारिता क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना की समीक्षा की गई, जिसमें साइट चयन और वित्तपोषण जैसे तकनीकी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। मंत्रालय का उद्देश्य PACS को केवल ऋण देने तक सीमित न रखकर उन्हें बहु-सेवा केंद्रों में बदलना है, जहाँ बीज वितरण, उर्वरक आपूर्ति, जन औषधि केंद्र और डिजिटल सेवाओं जैसी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिल सकें।
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सहकारी बैंकिंग प्रणाली को और मजबूत करने के लिए ऋण स्वीकृति में तेजी लाने और साइबर सुरक्षा को पुख्ता करने पर भी बल दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आधार सीडिंग, डोरस्टेप बैंकिंग और नई तकनीक को अपनाना अनिवार्य है। वाराणसी में हुई यह चर्चा दर्शाती है कि सरकार सहकारिता को एक जन-आंदोलन बनाकर समावेशी विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

