मुंबई:
हिंदी सिनेमा में गंभीर और शांत नायकों के पारंपरिक दौर में एक ऐसा सितारा उभरा, जिसने आते ही पर्दे की पूरी परिभाषा बदल दी। अनूठी डांसिंग स्टाइल, हवा में लहराते बाल, शरारती मुस्कान और बर्फ की वादियों में ‘याहू!’ की वो बेपरवाह पुकार—शम्मी कपूर सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि ऊर्जा और बगावत का पर्याय थे। 21 अक्टूबर को उनकी जयंती पर आइए पलटते हैं उस अदाकार की जिंदगी के पन्ने, जिसने असफलता की राख से निकलकर पर्दे पर अपना अलग साम्राज्य खड़ा किया।
₹50 से शुरुआत, लगातार 18 फिल्मों की असफलता के बाद बदली किस्मत
21 अक्टूबर, 1931 को मुंबई में जन्मे शमशेर राज कपूर (शम्मी कपूर) दिग्गज अभिनेता पृथ्वीराज कपूर के बेटे और राज कपूर व शशि कपूर के भाई थे। फिल्मी परिवार से होने के बावजूद उनका रास्ता कांटों भरा रहा:
-
पृथ्वी थिएटर से आगाज: उन्होंने करियर की शुरुआत अपने पिता के पृथ्वी थिएटर से एक जूनियर कलाकार के रूप में की, जहां उन्हें मात्र ₹50 मासिक वेतन मिलता था।
-
18 फिल्मों का लंबा संघर्ष: 1953 में ‘जीवन ज्योति’ से डेब्यू करने के बाद ‘रेल का डिब्बा’, ‘लैला मजनू’, ‘ठोकर’ और ‘शमा परवाना’ जैसी शुरुआती 18 फिल्में बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं दिखा सकीं।
-
‘तुमसा नहीं देखा’ से नया जन्म: लगातार झटकों के बाद उन्होंने पारंपरिक गंभीर हीरो की छवि तोड़ी। 1957 में फिल्म ‘तुमसा नहीं देखा’ से उनके भीतर का मस्तीभरा और बेफिक्र अंदाज सामने आया, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने ‘जंगली’, ‘प्रोफेसर’, ‘चाइना टाउन’, ‘कश्मीर की कली’, ‘तीसरी मंजिल’ और ‘ब्रह्मचारी’ समेत करीब 100 फिल्मों में अपनी अमिट छाप छोड़ी।
क्यों कहलाए ‘भारत का एल्विस प्रेस्ली’?
शम्मी कपूर को भारतीय सिनेमा का एल्विस प्रेस्ली कहा गया। उस दौर में जब अभिनेता गानों पर सिर्फ होंठ हिलाते थे, शम्मी अपने पूरे जिस्म, चेहरे के हाव-भाव और रॉक-एंड-रोल स्टाइल से संगीत को जीवंत कर देते थे। मोहम्मद रफी की आवाज और शम्मी की अदायगी का मेल पर्दे पर जादू करता था। ‘बदन पे सितारे’, ‘आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा’ और ‘चाहे कोई मुझे जंगली कहे’ जैसे गानों के संगीत संयोजन और रिकॉर्डिंग में वे खुद दिलचस्पी लेते थे।
दिलचस्प किस्से: ‘याहू’ के मालिक समझ बैठे थे लोग, भारत आने से पहले चलाया इंटरनेट
-
इंटरनेट कंपनी का मालिक? 1990 के दशक में जब मशहूर सर्च इंजन ‘याहू’ (Yahoo) आया, तो कई लोग इसे शम्मी कपूर की कंपनी समझने लगे। यहां तक कि उनके भतीजे रणधीर कपूर ने भी एक बार उनसे पूछ लिया था, “चाचा, आपने इतनी बड़ी इंटरनेट कंपनी खोल ली और हमें बताया तक नहीं?”
-
टेक्नोलॉजी के दीवाने: शम्मी कपूर को कंप्यूटर और इंटरनेट में गजब की दिलचस्पी थी। वे उस दौर में इंटरनेट चलाने लगे थे जब भारत में इसका प्रसार बेहद सीमित था। उन्होंने पूरे कपूर खानदान के लिए एक वेबसाइट भी बनाई, जो आज भी मौजूद है।
निजी जिंदगी: गीता बाली का साथ, बिछोह का दर्द और 21 दिन शराब से तौबा
शम्मी कपूर की निजी जिंदगी बेहद भावुक और उतार-चढ़ाव भरी रही:
-
पहली मोहब्बत: 1955 में उन्होंने मशहूर अभिनेत्री गीता बाली से प्रेम विवाह किया। उस वक्त शम्मी स्टार नहीं बने थे। उनके दो बच्चे—आदित्य राज कपूर और कंचन कपूर हुए।
-
दुखों का पहाड़: 1965 में बीमारी के चलते गीता बाली का आकस्मिक निधन हो गया। गीता 1 जनवरी को बीमार पड़ी थीं और 21 जनवरी को उनका देहांत हुआ था। इस गहरे सदमे के बाद शम्मी कपूर ने प्रण लिया कि वे हर साल 1 जनवरी से 21 जनवरी के बीच कभी शराब नहीं पिएंगे, जिसे उन्होंने आजीवन निभाया।
-
बाद में 1969 में उन्होंने नीला देवी गोहिल से दूसरी शादी की।
एक दिन में 100 सिगरेट और ‘रॉकस्टार’ पर अंतिम पर्दा
पत्नी नीला देवी ने एक साक्षात्कार में खुलासा किया था कि शम्मी कपूर अत्यधिक सिगरेट पीने के आदी थे; वे एक दिन में 100-100 सिगरेट तक पी जाते थे। अत्यधिक धूम्रपान के कारण 2003 में उनके फेफड़े खराब हो गए। फेफड़ों के इलाज के लिए दी गई दवाओं के साइड इफेक्ट्स से उनके गुर्दे (किडनी) भी प्रभावित हुए, जो अंततः उनके निधन का कारण बने।
साल 2011 में रिलीज हुई इम्तियाज अली की फिल्म ‘रॉकस्टार’ उनकी आखिरी फिल्म साबित हुई। इसमें वे अपने पोते (भतीजे ऋषि कपूर के बेटे) रणबीर कपूर के साथ नजर आए, जिसने पर्दे पर कपूर खानदान की दो पीढ़ियों के बेजोड़ संगम को हमेशा के लिए अमर कर दिया।


