प्रोबेशन में 70-80-90% वेतन देने का नियम खारिज, न्यूनतम वेतनमान देने के आदेश
नई दिल्ली:
देशभर में मानव तस्करी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) के संगठित नेटवर्क पर नकेल कसने और पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश दिया है कि वे मानव तस्करी रोधी विशेष इकाइयों—एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स (AHTU)—को पूर्ण पुलिस थाने (Police Station) का दर्जा दें। इसके लिए सभी राज्यों के गृह विभागों को तत्काल आवश्यक अधिसूचना जारी करने के आदेश दिए गए हैं।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ ने महिलाओं और बच्चों के यौन शोषण के उद्देश्य से की जाने वाली तस्करी से जुड़े एक गंभीर मामले की सुनवाई के दौरान यह व्यवस्था दी।
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सीधे दर्ज होगी FIR, दूसरे थानों के चक्करों से मिलेगी मुक्ति
सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार को भी निर्देशित किया है कि वह राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर इस आदेश को जल्द से जल्द जमीन पर लागू कराए।
पुलिस थाने का दर्जा मिलने के बाद AHTU अपने अधिकार क्षेत्र में सीधे प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कर सकेंगी और मामले की स्वतंत्र जांच कर पाएंगी।अब तक पीड़ितों या बचावकर्मियों को मामला दर्ज कराने के लिए स्थानीय सामान्य पुलिस थानों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे कानूनी प्रक्रिया में अनावश्यक देरी और तकनीकी अड़चनें आती थीं। नई व्यवस्था से यह बाधा पूरी तरह खत्म होगी।
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‘मर्जी’ का दावा होने पर भी मजिस्ट्रेट करेंगे प्राथमिक जांच
फैसले में एक बेहद अहम मानवीय और कानूनी पहलू को शामिल करते हुए पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि तस्करी के चंगुल से छुड़ाई गई कोई वयस्क महिला यह दावा भी करती है कि वह अपनी मर्जी से देह व्यापार (सेक्स वर्क) में संलग्न थी, तब भी संबंधित मजिस्ट्रेट को मामले की प्राथमिक जांच (Preliminary Inquiry) अनिवार्य रूप से करनी होगी।
अदालत का मानना है कि कई बार दबाव, धमकियों या पारिवारिक मजबूरी के चलते महिलाएं ऐसा बयान देती हैं। इसलिए मजिस्ट्रेट इस बात की गहन पड़ताल करेंगे कि महिला वास्तव में अपनी स्वतंत्र इच्छा से काम कर रही थी या फिर उसे ब्लैकमेल, भय अथवा किसी तरह के दबाव में इस दलदल में धकेला गया था।
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राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी बनाएगी मानक दिशा-निर्देश
देशभर की अदालतों में एक समान प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (National Judicial Academy) को विस्तृत नियम व दिशा-निर्देश (Guidelines) तैयार करने का जिम्मा सौंपा है।
इन दिशा-निर्देशों के आधार पर सभी राज्यों के मजिस्ट्रेट पीड़ितों के बयानों और पुनर्वास मामलों में एकरूपता के साथ प्रक्रिया पूरी करेंगे।इसके अलावा शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से भी जवाब तलब किया है कि तस्करी के शिकार लोगों की सहायता और पुनर्वास के लिए बनाई गई योजनाओं का धरातल पर क्या असर हो रहा है और उनकी निगरानी (Monitoring) के लिए क्या तंत्र काम कर रहा है।


