260 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के साथ शुरू होगा आरामदायक यात्रा का नया युग
नई दिल्ली: भारतीय रेल लंबी दूरी के सफर को पूरी तरह बदलने की तैयारी में है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोकसभा में घोषणा की कि सरकार ने 260 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट के निर्माण की एक व्यापक योजना तैयार की है। बीईएमएल (BEML) और चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) के नेतृत्व में इन ट्रेनों का निर्माण चरणबद्ध तरीके से शुरू हो चुका है, जिसका उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, भरोसेमंद और आधुनिक यात्रा अनुभव प्रदान करना है।
रफ़्तार के साथ सुरक्षा का कवच ये नई स्लीपर ट्रेनें अपनी 180 किमी प्रति घंटे की डिजाइन गति और उच्च त्वरण के साथ समय की बचत करेंगी। सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इन्हें स्वदेशी ‘कवच’ प्रणाली से लैस किया गया है। ट्रेन के कोचों का ढांचा ‘क्रैश-योग्य’ डिजाइन पर आधारित है, जो किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षा प्रदान करेगा। इसके अलावा, झटके-रहित यात्रा के लिए इसमें सेमी-परमानेंट कनेक्टर्स का उपयोग किया गया है।
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स्वच्छता और स्वास्थ्य पर विशेष जोर वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्वच्छ वायु तकनीक है। एयर कंडीशनिंग इकाइयों में विशेष UV-C लैम्प लगाए गए हैं, जो हवा में मौजूद 99% बैक्टीरिया और वायरस को निष्क्रिय कर देते हैं, जिससे यात्रियों को अस्पताल जैसी स्वच्छ हवा मिलेगी। अग्नि सुरक्षा के लिए इनमें एरोसोल आधारित अत्याधुनिक डिटेक्शन और रोकथाम प्रणाली भी लगाई गई है।
आधुनिक सुविधाओं का संगम यात्रियों की सुविधा के लिए इसमें पूरी तरह से सील किए गए चौड़े गलियारे, केंद्रीय रूप से नियंत्रित स्वचालित प्लग दरवाजे और दिव्यांगजनों के लिए विशेष शौचालयों की व्यवस्था की गई है। ऊपरी बर्थ पर चढ़ने के लिए एर्गोनोमिक रूप से डिजाइन की गई नई सीढ़ियां दी गई हैं, जिससे बुजुर्गों और बच्चों को भी आसानी होगी। रीयल-टाइम निगरानी के लिए पूरी ट्रेन में सीसीटीवी और एक केंद्रीय कोच निगरानी प्रणाली (Centralized Coach Monitoring System) स्थापित की गई है।
चरणबद्ध तरीके से होगी शुरुआत रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रोटोटाइप के सफल परीक्षण और परिचालन तैयारियों के आधार पर इन ट्रेनों को नियमित यात्री सेवाओं में शामिल किया जाएगा। ये ट्रेनें न केवल भारतीय रेलवे के तकनीकी नवाचार का प्रतीक हैं, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ की दिशा में भी एक बड़ा मील का पत्थर साबित होंगी।
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