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रायपुर/नई दिल्ली।

देश की सड़कों पर हर दिन लाखों दुपहिया वाहन दौड़ते हैं। हवा से बातें करती रफ्तार और समय पर मंजिल तक पहुंचने की जल्दी के बीच अक्सर लोग अपनी सबसे कीमती चीज—यानी अपनी जान—को जोखिम में डाल देते हैं। भारत में होने वाले सड़क हादसों की पड़ताल करें, तो एक चौंकाने वाला सच सामने आता है कि दुपहिया वाहन दुर्घटनाओं में होने वाली अधिकांश मौतों की वजह सिर पर गंभीर चोट (Head Injury) लगना होता है। ऐसे में ‘हेलमेट’ सिर्फ एक पुलिसिया कानून या चालान से बचने का जरिया नहीं, बल्कि जिंदगी और मौत के बीच का असली सुरक्षा कवच है।

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चालान के डर से नहीं, जान की परवाह के लिए पहनें हेलमेट

जमीनी हकीकत देखी जाए तो आज भी कई शहरों और ग्रामीण इलाकों में लोग हेलमेट का उपयोग केवल तभी करते हैं, जब सामने ट्रैफिक पुलिस खड़ी हो। चौराहे पर पुलिस को देखकर हेलमेट पहनना और उनके हटते ही उसे वापस गाड़ी के हैंडल पर टांग लेना एक आम नजारा बन चुका है। लेकिन डॉक्टरों और ट्रैफिक विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क पर हादसा कभी पुलिस देखकर नहीं होता। सिर हमारे शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा है, और दुर्घटना के वक्त अगर सिर सुरक्षित है, तो बचने की संभावना 80 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। इसलिए हेलमेट को अपनी आदत में शामिल करना बेहद जरूरी है।

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नकली और सस्ते हेलमेट से बचें: आईएसआई (ISI) मार्क ही असली गारंटी

बाजार में आजकल 100 से 200 रुपये में फुटपाथ पर बिकने वाले घटिया प्लास्टिक के हेलमेट की बाढ़ आई हुई है। लोग चालान से बचने के लिए इन्हें खरीद तो लेते हैं, लेकिन ये नकली हेलमेट सुरक्षा के नाम पर एक बड़ा धोखा हैं। किसी भी दुर्घटना के वक्त ये सस्ते हेलमेट कंक्रीट की सड़क का दबाव नहीं झेल पाते और तुरंत टूट जाते हैं, जिससे सिर पर सीधे चोट लगती है।

केंद्र सरकार और परिवहन विभाग के नियमों के मुताबिक, हमेशा भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा प्रमाणित ISI मार्क वाला हेलमेट ही खरीदना और पहनना चाहिए। आईएसआई मार्क इस बात की गारंटी होता है कि हेलमेट को कड़े सुरक्षा मानकों और क्रैश टेस्ट से गुजारकर बनाया गया है, जो किसी भी बड़े झटके को सोखने में सक्षम है।

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हेलमेट पहनते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान

केवल हेलमेट खरीद लेना ही काफी नहीं है, उसे सही तरीके से पहनना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कई लोग हेलमेट तो पहनते हैं, लेकिन उसकी ‘स्ट्रैप’ यानी नीचे की बेल्ट (Lock) को खुला छोड़ देते हैं। ऐसे में जैसे ही गाड़ी किसी गाड़ी से टकराती है, हेलमेट सिर से छिटककर दूर गिर जाता है और सिर असुरक्षित रह जाता है। हमेशा हेलमेट लगाने के बाद उसकी बेल्ट को कसकर लॉक करें। इसके अलावा, हाफ-फेस (आधा चेहरा ढकने वाले) हेलमेट के बजाय फुल-फेस हेलमेट को प्राथमिकता दें, क्योंकि यह आपके जबड़े और पूरे चेहरे को सुरक्षा प्रदान करता है।

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अंतिम बात: सुरक्षित सफर ही सबसे बड़ा सुख

घर पर कोई आपका इंतजार कर रहा है, यह बात हर वाहन चालक को याद रखनी चाहिए। सरकार और प्रशासन लगातार जागरूकता अभियानों और सख्त नियमों के जरिए लोगों को हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। लेकिन असली बदलाव तब आएगा जब हर नागरिक इसे अपनी जिम्मेदारी समझेगा। अगली बार जब आप अपनी मोटरसाइकिल या स्कूटर की चाबी उठाएं, तो साथ में हेलमेट उठाना न भूलें। याद रखें, एक छोटी सी लापरवाही पूरे परिवार को उम्र भर का दर्द दे सकती है। सुरक्षित चलें, सुरक्षित पहुंचें।

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