मुंबई:
पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के नियमों में बड़े संशोधनों की घोषणा की है। नए दिशानिर्देशों के तहत एक्सपायरी के दिन इंडेक्स और स्टॉक डेरिवेटिव्स का निपटान (सेटलमेंट) कैश मार्केट के आखिरी 30 मिनट के कारोबार के आधार पर किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, क्लोजिंग ऑक्शन की समय-सारिणी और सामान्य सत्र के अधूरे ऑर्डर्स को आगे ले जाने (कैरी-फॉरवर्ड) के प्रावधानों में भी बदलाव किए गए हैं।
नियामक के अनुसार, इनमें से अधिकांश नए नियम 7 दिसंबर 2026 से प्रभावी होंगे, जबकि सामान्य सत्र से CAS में अधूरे लिमिट और आइसबर्ग (Iceberg) ऑर्डर्स को ले जाने से जुड़े नियम 8 फरवरी 2027 से लागू किए जाएंगे।
कैसे तय होगा सेटलमेंट प्राइस?
एक्सपायरी के दिन सेटलमेंट भाव तय करने के लिए वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) व्यवस्था को मान्यता दी गई है:
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इंडेक्स डेरिवेटिव्स: संबंधित इंडेक्स में शामिल शेयरों के दोपहर 3:00 बजे से 3:30 बजे के बीच सभी एक्सचेंजों पर हुए कुल कारोबार के VWAP को आधार माना जाएगा।
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स्टॉक डेरिवेटिव्स: व्यक्तिगत शेयरों के डेरिवेटिव्स के लिए उसी शेयर के आखिरी 30 मिनट (3:00 से 3:30 बजे) के संयुक्त VWAP से सेटलमेंट भाव निकलेगा।
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संभावित भाव के संकेत: एक्सचेंज इस दौरान क्लियरिंग कॉरपोरेशन को लगातार औसत मूल्य और ट्रेडिंग वॉल्यूम भेजते रहेंगे, जिससे बाजार के प्रतिभागियों को रियल-टाइम में संभावित सेटलमेंट भाव का अंदाजा मिलता रहेगा।
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) का नया टाइम-टेबल
क्लोजिंग ऑक्शन के समय चक्र को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया गया है:
डेरिवेटिव्स और कैश मार्केट में ट्रेडिंग का समय
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इंडेक्स कॉन्ट्रैक्ट्स: सामान्य दिनों में इंडेक्स डेरिवेटिव्स में दोपहर 3:45 बजे तक कारोबार होगा, लेकिन जिस दिन किसी इंडेक्स की एक्सपायरी होगी, उस दिन ट्रेडिंग 3:30 बजे ही समाप्त हो जाएगी।
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स्टॉक डेरिवेटिव्स: व्यक्तिगत शेयरों के फ्यूचर्स व ऑप्शंस में एक्सपायरी के दिन भी 3:45 बजे तक सामान्य कारोबार जारी रहेगा।
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कैश मार्केट का पोस्ट-क्लोज सत्र: शाम 3:50 बजे से 4:00 बजे तक संचालित होगा, जिसमें शेयरों के आधिकारिक बंद भाव (Closing Price) पर सौदे किए जा सकेंगे।
अधूरे लिमिट और Iceberg ऑर्डर्स के लिए क्या हैं नए प्रावधान?
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अधूरे ऑर्डर्स का स्वतः ट्रांसफर: सामान्य कारोबारी सत्र में अनिष्पादित (Unfilled) रहे लिमिट ऑर्डर्स स्वतः CAS में ट्रांसफर हो जाएंगे, बशर्ते वे तय प्राइस बैंड के भीतर हों (स्टॉप-लॉस ऑर्डर्स आगे ट्रांसफर नहीं होंगे)।
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आइसबर्ग ऑर्डर्स: बड़े संस्थागत आइसबर्ग ऑर्डर्स, जिनकी पूरी मात्रा सामान्य स्क्रीन पर एक साथ नहीं दिखती, CAS में जाने पर पूरी मात्रा प्रदर्शित करने वाले सामान्य लिमिट ऑर्डर में बदल जाएंगे। निवेशकों को शुरुआती ऑर्डर देते समय इस व्यवस्था से बाहर रहने (ऑप्ट-आउट) का विकल्प भी उपलब्ध होगा।
20,000 से अधिक सुझावों के बाद सेबी ने लिया फैसला
उल्लेखनीय है कि 3 अगस्त को CAS की शुरुआत के बाद बाजार प्रतिभागियों और खुदरा ट्रेडर्स ने कम लिक्विडिटी, स्प्रेड में उतार-चढ़ाव और अप्रत्याशित सेटलमेंट भाव को लेकर चिंता जताई थी। सेबी के परामर्श पत्र पर मिले 20,000 से अधिक सार्वजनिक सुझावों में अधिकांश ट्रेडर्स व ब्रोकर्स ने आखिरी 30 मिनट के VWAP फॉर्मूले का पुरजोर समर्थन किया। बाजार की इस सर्वसम्मत मांग को स्वीकार करते हुए नियामक ने इस जाने-पहचाने और पारदर्शी फॉर्मूले को पुनः लागू करने की अंतिम मंजूरी दे दी है।


