संवाददाता |
मार्च से अगस्त के बीच पिछले पांच महीनों में आम जनता की रसोई पर महंगाई की बड़ी मार पड़ी है। चीनी, दाल, चावल, आटा, नमक और खाद्य तेलों सहित रोजमर्रा की किराना वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। थोक बाजार में बढ़ी दरों, परिवहन लागत (Freight Cost) में वृद्धि और बाजार में बढ़ती मांग के कारण खुदरा (रिटेल) कीमतों में यह उल्लेखनीय तेजी आई है।
गांधीनगर बाजार के किराना व्यापारी राधेश्याम के अनुसार, थोक मंडियों से ही माल महंगा मिलने की वजह से फुटकर दुकानदारों को मजबूरी में बढ़ी हुई दरों पर सामान बेचना पड़ रहा है।
मार्च बनाम अगस्त: प्रमुख किराना सामानों के दामों में तुलना
सबसे ज्यादा असर चावल और खाद्य तेलों पर देखा जा रहा है। चावल की कीमत में ₹20 प्रति किलो और सरसों के तेल में ₹25 प्रति लीटर तक का उछाल आया है।
| किराना सामग्री | मार्च की कीमत | अगस्त की कीमत | कुल बढ़ोतरी |
| चावल | ₹50 / किलो | ₹70 / किलो | ₹20 / किलो |
| सरसों तेल | ₹160 / लीटर | ₹185 / लीटर | ₹25 / लीटर |
| रिफाइंड तेल | ₹120 / लीटर | ₹145 / लीटर | ₹25 / लीटर |
| उड़द दाल | ₹110 / किलो | ₹125 / किलो | ₹15 / किलो |
| चीनी | ₹42 / किलो | ₹52 / किलो | ₹10 / किलो |
| अरहर दाल | ₹110 / किलो | ₹120 / किलो | ₹10 / किलो |
| चने की दाल | ₹75 / किलो | ₹85 / किलो | ₹10 / किलो |
| मसूर दाल | ₹72 / किलो | ₹80 / किलो | ₹8 / किलो |
| आटा (खुला) | ₹30 / किलो | ₹35 / किलो | ₹5 / किलो |
| नमक | ₹28 / किलो | ₹32 / किलो | ₹4 / किलो |
| मैदा | ₹28 / किलो | ₹30 / किलो | ₹2 / किलो |
मूल्य वृद्धि के प्रमुख कारण और जनजीवन पर असर
थोक दरों में तेजी और डीजल-परिवहन महंगा होने के कारण माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है, जिसका सीधा असर खुदरा कीमतों पर पड़ा है। आवश्यक खाद्य पदार्थों की कीमतें एक साथ बढ़ने से मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर महीने किराना बिल में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हो रही है, जिससे अन्य आवश्यक खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है।

