संवाददाता |
जिले में आम आदमी की रसोई के बजट पर महंगाई का एक और बड़ा बोझ आन पड़ा है। रोजमर्रा की सबसे आवश्यक वस्तुओं में शामिल चीनी (Sugar) की कीमतों में अचानक 5 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुछ दिनों पहले तक जो चीनी 48 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रही थी, वह अब बढ़कर 53 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है।
अचानक हुई इस मूल्य वृद्धि से एक ओर जहां आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा है, वहीं स्थानीय दुकानदार और व्यापारी भी इस अचानक आई तेजी से हैरान हैं।
कीमतों में उछाल की मुख्य वजह
स्थानीय दुकानदारों और थोक विक्रेताओं के अनुसार, सप्लाई करने वाले बड़े कारोबारियों की ओर से दरों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण गन्ने की बढ़ती मांग और इथेनॉल (Ethanol) उत्पादन को बताया जा रहा है।
इथेनॉल उत्पादन पर जोर:
इथेनॉल निर्माण के लिए गन्ने के बढ़ते इस्तेमाल के कारण बाजार में चीनी उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हुई है। थोक स्तर से ही महंगे दामों पर चीनी मिल रही है, जिसके चलते फुटकर बाजार में 53 रुपये प्रति किलो की दर से बिक्री करनी पड़ रही है।
घरेलू बजट पर सीधा असर और जनता की मांग
जिले में बड़ी संख्या में लोग अपनी दैनिक जरूरतों के लिए निजी किराना दुकानों पर निर्भर हैं। खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की पहले से बढ़ी दरों के बीच चीनी के दाम बढ़ने से मध्यम व निम्न वर्ग के परिवारों का मासिक बजट गड़बड़ा गया है।
उपभोक्ताओं की चिंता:
स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर घर में चाय, मिठाई और दैनिक खान-पान में चीनी का नियमित उपयोग होता है। ऐसे में 5 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर डाका डालने जैसी है।आम जनता ने जिला प्रशासन और खाद्य आपूर्ति विभाग से मांग की है कि बाजार में जमाखोरी रोकने और कीमतों की नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए, ताकि कोई भी व्यापारी मनमाने दाम न वसूल सके।

