पद्म पुरस्कार 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रदान किए नागरिक सम्मान; अभिनेता धर्मेंद्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण
सूरजपुर: सरकारी नौकरी लगाने के नाम पर धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले एक शातिर आरोपी को सूरजपुर न्यायालय ने कड़ी सजा सुनाई है। माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को 3 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है।
यह पूरा मामला आबकारी विभाग में भृत्य (चपरासी) की नौकरी लगाने के नाम पर फर्जी नियुक्ति आदेश देने से जुड़ा है।
इबोला का वैश्विक हाहाकार: रायपुर एयरपोर्ट पर हाई अलर्ट जारी, छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने तैनात किए स्पेशल नोडल अफसर
क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2018 का है। प्रार्थी अशोक दास ने 10 जुलाई 2018 को थाना प्रेमनगर में शिकायत दर्ज कराई थी कि एक व्यक्ति ने आबकारी विभाग में भृत्य के पद पर नौकरी लगवाने का झांसा देकर उससे 1 लाख रुपये ऐंठ लिए। रुपये लेने के बाद आरोपी ने बकायदा विभाग का एक नियुक्ति आदेश भी प्रार्थी को सौंप दिया।
जब प्रार्थी इस नियुक्ति आदेश को लेकर संबंधित विभाग के कार्यालय में तस्दीक करने पहुंचा, तब इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। विभाग ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ है और वह पूरी तरह फर्जी है।
हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: सेवानिवृत्ति की तारीख पर लागू नियमों से ही तय होगी पेंशन, बाद के संशोधनों का नहीं मिलेगा पूर्वव्यापी लाभ
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और पुख्ता विवेचना
प्रार्थी की रिपोर्ट पर प्रेमनगर पुलिस ने अपराध क्रमांक 53/18 के तहत धारा 420, 467, 468, 471 (भारतीय दण्ड संहिता) के तहत मामला पंजीबद्ध किया। मामले के विवेचक निरीक्षक बसंत लाल सिंह ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और मामले से जुड़े सभी पुख्ता और तकनीकी साक्ष्य संकलित किए। विवेचना पूर्ण होने के बाद आरोप पत्र माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी न्यायालय सूरजपुर में पेश किया गया।
सावधान रील्स लवर्स! एयरपोर्ट पर वीडियो बनाया तो उड़ जाएंगे होश, फोन होगा जब्त और हवाई यात्रा पर लगेगा ‘नो-फ्लाई’ बैन!
न्यायालय का फैसला: 3 वर्ष का कारावास
इस महत्वपूर्ण मामले की अंतिम सुनवाई विद्वान न्यायाधीश श्रीमती रुचि मिश्रा (न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, सूरजपुर) की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीपीओ राजेश सिंह और पंकज कुमार बागड़े ने प्रभावी पैरवी की और न्यायालय के समक्ष मजबूत साक्ष्य रखे।
न्यायालय ने समग्र तथ्यों, गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर धोखाधड़ी के आरोप को सही पाया। दोषसिद्ध होने पर माननीय न्यायालय ने दिनांक 13 मई 2026 को अपना फैसला सुनाते हुए आरोपी को:धारा 420 आईपीसी के तहत 3 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।इसके साथ ही 500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो भोले-भाले युवाओं को सरकारी नौकरी का लालच देकर ठगी का शिकार बनाते हैं। पुलिस और प्रशासन लगातार नागरिकों से अपील करता है कि किसी भी बिचौलिए या अज्ञात व्यक्ति के झांसे में आकर नौकरी के नाम पर पैसों का लेन-देन न करें।

