नई दिल्ली। देश में पेट्रोल आयात पर निर्भरता घटाने और पर्यावरण प्रदूषण में कमी लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने ‘इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल’ (EBP) कार्यक्रम को रफ्तार देने की बड़ी तैयारी की है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की ओर से भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने नवंबर से शुरू होने वाले नए आपूर्ति वर्ष (2026-27) के लिए करीब 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल की खरीद हेतु राष्ट्रव्यापी निविदा (टेंडर) जारी की है।
इस मेगा टेंडर का मुख्य लक्ष्य देश भर में पेट्रोल के भीतर 20 प्रतिशत (E20) इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को पूरा करना है।
गन्ने के रस और चाशनी से बने इथेनॉल पर रोक क्यों?
घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और आम उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने के लिए सरकार ने कच्चे माल की रणनीति में बड़ा फेरबदल किया है:
नई निविदा में गन्ने के शुद्ध रस (Sugarcane Juice), चीनी की चाशनी (Sugar Syrup) और बी-हेवी शीरे (B-Heavy Molasses) से तैयार होने वाले इथेनॉल को खरीद प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में मानसूनी बारिश की अनिश्चितता के चलते चीनी उत्पादन घटने और खुदरा कीमतों में उछाल का जोखिम बना हुआ है। इसी को ध्यान में रखते हुए चीनी के डायवर्जन पर फिलहाल रोक लगाई गई है।
मक्के से बने इथेनॉल की प्रोत्साहन राशि में कटौती
निविदा की शर्तों के मुताबिक, पेट्रोल मिश्रण कार्यक्रम अब मुख्य रूप से अनाज आधारित और सी-हेवी शीरे पर केंद्रित रहेगा:
टेंडर के तहत मक्का (Maize), टूटे चावल (Damaged Food Grains), भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अधिशेष चावल और सी-हेवी शीरे (C-Heavy Molasses) से बने इथेनॉल के लिए बोलियां आमंत्रित की गई हैं। मक्के से तैयार इथेनॉल के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को घटाकर अब 68.86 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है, जो पहले 71.86 रुपये प्रति लीटर थी।
कच्चे माल की रणनीति में बड़ा बदलाव
अब तक पेट्रोल ब्लेंडिंग प्रोग्राम में अनाज और गन्ना दोनों का संतुलित उपयोग किया जाता रहा है, लेकिन गन्ने के रस से बनने वाले इथेनॉल पर अस्थाई रोक लगने से आपूर्ति का पूरा भार अब डिस्टिलरीज के ग्रेन-बेस्ड (अनाज आधारित) प्लांट्स और शीरे पर आ गया है।
सरकार का मानना है कि इस नीतिगत बदलाव से देश में चीनी का पर्याप्त बफर स्टॉक बना रहेगा और साथ ही कच्चे तेल के आयात बिल में कटौती का लक्ष्य भी बिना किसी बाधा के आगे बढ़ता रहेगा।


