केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ‘अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन’ (ANRF) की प्रगति की समीक्षा करते हुए भारत के वैज्ञानिक भविष्य का एक नया खाका पेश किया है। इस बैठक का मुख्य केंद्र विज्ञान को प्रयोगशालाओं से निकालकर समाज के हर वर्ग तक पहुँचाना रहा। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए ANRF ‘SARAL AI’ नामक एक अत्याधुनिक एआई-आधारित प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म जटिल वैज्ञानिक शोध पत्रों और पेटेंटों को सरल भाषा में बदलकर 18 भारतीय भाषाओं में पॉडकास्ट, छोटे वीडियो, पोस्टर और सोशल मीडिया सामग्री के रूप में प्रस्तुत करेगा। डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा कि अनुसंधान के परिणामों को ऐसे सरल प्रारूपों में पेश किया जाना चाहिए जिससे देश का आम नागरिक उनकी प्रासंगिकता और अपने जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को स्पष्ट रूप से समझ सके।
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अनुसंधान की दिशा में ‘MAHA’ (उच्च प्रभाव वाले क्षेत्रों में प्रगति के लिए मिशन) कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। ये मिशन-संचालित पहलें उद्योग, शिक्षा जगत और सरकार को एक साथ लाकर राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर काम करेंगी। इसमें विशेष रूप से ‘सामाजिक नवाचार’ के लिए एक समर्पित कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है, जो प्रदूषण नियंत्रण, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, सतत कृषि और सामुदायिक स्वास्थ्य जैसी गंभीर सामाजिक चुनौतियों के तकनीकी समाधान पर केंद्रित होगा। पिछले चार महीनों में लगभग 20,000 शोध आवेदनों का मूल्यांकन किया जाना इस बात का प्रमाण है कि भारत का अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र अब और भी मजबूत और गतिशील हो रहा है।
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युवा शोधकर्ताओं और प्रारंभिक करियर के वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने के लिए फाउंडेशन ने ‘लाइटनिंग टॉक सीरीज़’ और डिजिटल वेबिनार जैसे मंच उपलब्ध कराए हैं। इसके साथ ही, शोध कार्य में आने वाली प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के लिए लगभग 250 प्रमुख संस्थानों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जो वैज्ञानिकों को कागजी बोझ से मुक्त कर उनके प्रोजेक्ट्स के सुचारू संचालन में मदद करेंगे। सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान के लिए व्हाट्सएप चैनल जैसे आधुनिक संचार माध्यमों का भी सहारा लिया जा रहा है। कुल मिलाकर, यह नई रणनीति न केवल भारतीय शोध की दृश्यता बढ़ाएगी, बल्कि वैज्ञानिक ज्ञान को एक समावेशी राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम भी बनाएगी।

