रायपुर। छत्तीसगढ़ के शिक्षक समाज के सामने आज तीन ऐसे मूलभूत विषय खड़े हैं, जिनका समाधान केवल एक वर्ग नहीं बल्कि पूरे शिक्षक समुदाय के भविष्य, सम्मान, आर्थिक सुरक्षा एवं सेवा अधिकारों से जुड़ा हुआ है। वेतन विसंगति का न्यायपूर्ण समाधान, टेट मुद्दे पर सेवा सुरक्षा तथा पूर्व सेवा की गणना करते हुए समस्त सेवा लाभ प्रदान करना आज प्रत्येक शिक्षक की साझा आवश्यकता बन चुकी है।
प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर, प्रदीप पाण्डेय एवं विकास सिंह राजपूत ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि प्राथमिक, माध्यमिक, हाई एवं हायर सेकेंडरी सहित समस्त शिक्षक संवर्ग संगठनात्मक सीमाओं और व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर शिक्षक हित में एकजुट हो। जब तक शिक्षक अलग-अलग मंचों से अपनी आवाज उठाते रहेंगे, तब तक उनकी मांगों को वह प्रभाव नहीं मिलेगा जिसकी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि इन तीनों प्रमुख मांगों में शिक्षकों की अधिकांश समस्याओं का समाधान निहित है। यदि वेतन विसंगति दूर होती है, टेट से जुड़े शिक्षकों को सेवा सुरक्षा प्राप्त होती है तथा पूर्व सेवा की गणना कर समस्त वैधानिक लाभ दिए जाते हैं, तो लाखों शिक्षकों के भविष्य की अनिश्चितता समाप्त होगी तथा शिक्षा व्यवस्था को भी स्थायित्व और मजबूती मिलेगी।
नेताओं ने कहा कि यह संघर्ष किसी एक संगठन, किसी एक पद या किसी एक संवर्ग का नहीं है, बल्कि पूरे शिक्षक समाज के सम्मान और अधिकारों का संघर्ष है। आज आवश्यकता किसी संगठन को बड़ा या छोटा सिद्ध करने की नहीं, बल्कि शिक्षक शक्ति को एकजुट कर सरकार के समक्ष प्रभावी और सकारात्मक ढंग से अपनी बात रखने की है।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक समाज की एकता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। जब समस्त शिक्षक संवर्ग एक स्वर में अपनी मांगों को रखेगा, तब सरकार के लिए भी इन मांगों पर गंभीर एवं सकारात्मक निर्णय लेना आसान होगा। इतिहास गवाह है कि संगठित समाज ही अपने अधिकारों को प्राप्त करने में सफल होता है।
प्रदेश अध्यक्षों ने प्रदेश के प्रत्येक शिक्षक, प्रत्येक संगठन, प्रत्येक पदाधिकारी एवं प्रत्येक कर्मचारी प्रतिनिधि से अपील की कि वे व्यक्तिगत विचारधाराओं और संगठनात्मक सीमाओं से ऊपर उठकर शिक्षक हित में एक साझा मंच तैयार करें। यह समय एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि एक-दूसरे का हाथ थामकर शिक्षक समाज के भविष्य को सुरक्षित करने का है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि प्रदेश का समस्त शिक्षक संवर्ग एकजुट होकर इन तीन प्रमुख मांगों के लिए संघर्ष करता है, तो निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे और आने वाली पीढ़ियों के शिक्षकों के लिए भी सेवा सुरक्षा एवं सम्मानजनक व्यवस्था सुनिश्चित होगी।

