नई दिल्ली/रायपुर: नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित 11वें ब्रिक्स लीगल फोरम (BRICS Legal Forum) में छत्तीसगढ़ के अधिवक्ताओं विनय दुबे और आशीष शुक्ला ने प्रतिनिधित्व किया। दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 11 देशों के प्रतिनिधियों और वैश्विक विधि विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का मुख्य विषय आर्थिक लचीलेपन, नवाचार और स्थिरता के लिए कानून के शासन के ढांचे तथा संस्थागत क्षमता निर्माण पर केंद्रित रहा, जिसमें बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुकूल कानूनी ढांचे को ढालने पर जोर दिया गया।
अंतरराष्ट्रीय कानूनी समन्वय और जनहित पर जोर सम्मेलन के अनुभवों को साझा करते हुए अधिवक्ता विनय दुबे ने बताया कि आज के दौर में विभिन्न देशों की विधिक प्रणालियों के बीच आपसी सहयोग और समन्वय अत्यंत आवश्यक है। कानून और संविधान के मूल सिद्धांतों का सम्मान करते हुए ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे देश एक-दूसरे की कानूनी प्रणाली से बेहतर तरीके से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि कानून में स्थिरता के साथ परिस्थितियों के अनुसार लचीलापन होना चाहिए और किसी भी नई कानूनी व्यवस्था के केंद्र में जनहित की रक्षा सर्वोपरि रहनी चाहिए। इसके साथ ही फोरम में विधि शिक्षा के स्तर को सुधारने और मानवाधिकारों के संरक्षण पर भी चर्चा हुई।
‘न्याय सेतु’ की अवधारणा और समय पर न्याय फोरम को संबोधित करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत और अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अंतरराष्ट्रीय कानूनी परिदृश्य पर विचार रखे। मुख्य न्यायाधीश ने सदस्य देशों की विविध कानूनी परंपराओं को जोड़ने और न्यायिक संस्थाओं के बीच परस्पर विश्वास सुदृढ़ करने के लिए ‘न्याय सेतु’ की अवधारणा प्रस्तुत की। उन्होंने रेखांकित किया कि मजबूत आर्थिक विकास के लिए समय पर न्याय मिलना सबसे अनिवार्य शर्त है।
ब्रिक्सैन और AI नियमन पर बनी सहमति, नई दिल्ली घोषणापत्र स्वीकार सीमा पार होने वाले व्यापारिक व व्यावसायिक विवादों के त्वरित समाधान के लिए प्रस्तावित ब्रिक्स आर्बिट्रेशन नेटवर्क (BRICS-AN) के गठन पर विस्तृत चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल गवर्नेंस के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए साझा कानूनी मानक तैयार करने, जलवायु वित्त और डिजिटल नियमन पर भी विशेषज्ञों ने विमर्श किया। दो दिवसीय विचार-मंथन के समापन पर सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने आपसी कानूनी सहयोग को औपचारिक रूप देने के लिए सर्वसम्मति से ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ को अंगीकार किया।























