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विशेष संवाददाता | रायपुर
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान आदिम जाति विकास विभाग (ट्रायबल डिपार्टमेंट) के अंतर्गत तकनीकी पदों की भारी कमी, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के नियमितीकरण और बस्तर संभाग के विकास कार्यों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। विधायक सुश्री लता उसेंडी द्वारा पूछे गए ध्यानाकर्षण प्रश्न का लिखित जवाब देते हुए आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने विभाग की वर्तमान स्थिति और विभिन्न योजनाओं का पूरा ब्योरा सदन के पटल पर रखा।
मंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, विभाग में खासकर उप अभियंताओं (Sub Engineers) के स्तर पर पदों की भारी रिक्तता बनी हुई है।
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इंजीनियरों का टोटा: उप अभियंता के 19 में से 17 पद रिक्त, जो बाहर हैं वे जल्द लौटेंगे
सदन में प्रस्तुत किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, आदिम जाति विकास विभाग में स्वीकृत और रिक्त पदों की स्थिति इस प्रकार है:
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सहायक अभियंता (Assistant Engineer): विभाग में कुल 06 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 05 पद भरे हुए हैं और केवल 01 पद रिक्त है।
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उप अभियंता (Sub Engineer): विभाग में कुल 19 पद स्वीकृत हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि केवल 02 पदों पर ही कर्मचारी पदस्थ हैं, जबकि 17 पद वर्तमान में खाली पड़े हैं।
मूल पदस्थापना से बाहर रहने वालों पर निर्देश: मंत्री ने बताया कि भरे हुए पदों पर पदस्थ अधिकारियों व कर्मचारियों का अधिकारीवार विवरण है। इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो अधिकारी अपनी मूल पदस्थापना वाली जगह पर कार्यरत नहीं हैं, उन्हें शीघ्र ही वापस उनकी मूल पदस्थापना पर पदस्थ किया जाएगा।
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चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के नियमितीकरण पर कोई स्थायी दिशा-निर्देश नहीं
कोंडागांव जिले सहित प्रदेश भर में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कर्मचारियों को बड़ा झटका दिया है। उन्होंने सदन में स्वीकार किया कि विभाग के अंतर्गत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के नियमितीकरण हेतु शासन के कोई स्थायी दिशा-निर्देश उपलब्ध नहीं हैं। इसी वजह से इस परिप्रेक्ष्य में नियमितीकरण की कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है।
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275(1) मद के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के कार्यों को मंजूरी
अनुच्छेद 275(1) मद के अंतर्गत स्वीकृत किए जाने वाले कार्यों और बजट आवंटन के संबंध में भी विस्तृत जानकारी दी गई: इस मद के तहत अनुसूचित जनजातीय (ST) समूहों की आवश्यकतानुसार मांग के आधार पर शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, विद्युतीकरण, सड़क संचार, कृषि, महिला एवं बाल विकास, नवीनीकृत ऊर्जा, बागवानी, पशुपालन, इको-टूरिज्म, डेयरी उद्योग, आजीविका एवं कौशल विकास जैसे बुनियादी क्षेत्रों में कार्यों की स्वीकृति का प्रावधान है।

