नई दिल्ली: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के फैसले पर विवाद गहरा गया है। टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, व्यापारियों को 0.4% एमडीआर के अलावा इस शुल्क पर 18 फीसदी जीएसटी (GST) का अतिरिक्त भुगतान भी करना होगा। हालांकि, व्यापारी इस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम कर सकेंगे, जिससे उनका शुद्ध टैक्स बोझ कुछ कम होगा। एनपीसीआई (NPCI) द्वारा घोषित यह नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होगी, जिसमें एमडीआर की अधिकतम सीमा ₹300 तय की गई है।
व्यापारी संगठनों के भारी विरोध के बावजूद केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यह फैसला किसी भी कीमत पर वापस नहीं लिया जाएगा।
फैसले पर अडिग केंद्र: ‘टिकाऊ राजस्व व्यवस्था जरूरी’
वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ किया कि निर्णय लिया जा चुका है और इसे वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
अधिकारी ने वित्त मामलों की स्थायी समिति की 32वीं रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक ‘जीरो एमडीआर’ व्यवस्था चलने से सरकारी खजाने पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश की रफ्तार धीमी होती है। सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को खारिज करते हुए वित्त मंत्रालय ने कहा कि इस फैसले के पीछे कोई विदेशी दबाव नहीं है; भारत अपने वित्तीय नीतियां पूरी तरह स्वतंत्र रूप से तय करता है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने फैसले का बचाव करते हुए चाणक्य नीति का उल्लेख किया कि सरकार को कर संग्रहण उसी तरह करना चाहिए जैसे मधुमक्खी फूल की पंखुड़ियों को नुकसान पहुंचाए बिना शहद इकट्ठा करती है।
इन श्रेणियों को राहत: ₹2,000 से ऊपर भी सिर्फ ₹5 चार्ज
आम जनता और जरूरी सेवाओं से जुड़े कारोबारियों को राहत देते हुए कुछ विशेष सेक्टर्स के लिए फ्लैट चार्ज तय किया गया है। ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर भी प्रति ट्रांजेक्शन केवल ₹5 का रियायती एमडीआर लागू होगा:
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रेलवे टिकट बुकिंग
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टेलीकॉम व इंटरनेट सेवाएं
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जीवन व स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम
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फ्यूल (पेट्रोल पंप)
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स्कूल व कॉलेज की फीस
विरोध तेज: सुप्रीम कोर्ट में याचिका, पेट्रोल पंप एसोसिएशन नाराज
अधिवक्ता अंजन दत्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर एमडीआर लगाने की अधिसूचना को चुनौती दी है। याचिका में इस फैसले को मनमाना, भेदभावपूर्ण और डिजिटल इंडिया की मुहिम के खिलाफ बताया गया है।ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने वित्त मंत्रालय को पत्र भेजकर पेट्रोल पंपों को एमडीआर के दायरे से पूरी तरह बाहर रखने की मांग की है। डीलर्स का कहना है कि ₹5 का फ्लैट चार्ज भी उनके कम मार्जिन वाले कारोबार पर प्रतिकूल असर डालेगा।























