राज्य में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के नाम पर निजी और बड़े अस्पतालों द्वारा मरीजों से की जा रही कथित मनमानी और ओवरचार्जिंग को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की समीक्षा में यह बात खुलकर सामने आई कि कई अस्पताल बुनियादी सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव के बावजूद मरीजों को भर्ती कर रहे हैं। योजना का लाभ लेने पहुंचे मरीजों को कई बार भ्रामक जानकारी देकर टरका दिया जाता है, तो कभी अस्पताल अपनी सुविधा के अनुसार इलाज के लिए हामी भर लेते हैं। इस पूरी अव्यवस्था और पारदर्शिता की कमी के कारण मरीजों व उनके परिजनों को गंभीर आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।
‘नो यूपीआई, केवल नकद’: 0.4% चार्ज के विरोध में दिल्ली के कारोबारी, दुकानों से हटाए जा रहे क्यूआर कोड
मरीजों की इन्हीं परेशानियों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने योजना से संबद्ध सभी निजी अस्पतालों को कड़ा नोटिस जारी किया है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि किसी अस्पताल में संबंधित बीमारी के विशेषज्ञ डॉक्टर या जरूरी मेडिकल सुविधाएं मौजूद नहीं हैं, तो वे मरीज को गुमराह करने के बजाय योजना के तहत इलाज से सीधे इनकार करें और उन्हें तत्काल उच्च चिकित्सा संस्थानों (हायर सेंटर) के लिए रेफर करें। विशेषज्ञ डॉक्टरों की गैर-मौजूदगी में मरीजों को भर्ती कर बाद में अचानक रेफर करने की प्रवृत्ति पर विभाग ने कड़ी चेतावनी दी है।
इसके अलावा, अस्पतालों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने नोटिस बोर्ड चस्पा करना अनिवार्य कर दिया है। अब प्रत्येक अनुबंधित अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार और ओपीडी परिसर में यह स्पष्ट प्रदर्शित करना होगा कि वहां आयुष्मान योजना के तहत किन-किन बीमारियों का उपचार उपलब्ध है और सरकार द्वारा तय पैकेज राशि कितनी है। इस व्यवस्था से मरीजों के बीच फैला संशय दूर होगा और निजी अस्पतालों की मनमानी पर पूरी तरह लगाम लगेगी।























