रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा में मानव अंगदान और प्रत्यारोपण के नियमों को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रदेश की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की है। विधायक अजय चंद्राकर द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में मंत्री ने बताया कि प्रदेश में मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 को जुलाई 2003 से ही लागू कर दिया गया है और शासकीय अस्पतालों में इसी आधार पर प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
स्वास्थ्य मंत्री ने जानकारी दी कि 31 जनवरी 2026 तक की स्थिति में छत्तीसगढ़ में कुल 189 मरीज पंजीकृत हैं, जिन्हें मानव अंगदान की तत्काल आवश्यकता है। इन मरीजों की सहायता और अंगदान को बढ़ावा देने के लिए राज्य में ‘राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन’ (SOTO) का गठन किया गया है। सोटो का कार्यालय रायपुर स्थित दाऊ कल्याण सिंह (DKS) उच्च श्रेणी संस्थान के प्रथम तल पर संचालित है, जिसे राष्ट्रीय संगठन (NOTO) द्वारा वर्ष 2022 से 2025 तक के लिए 84 लाख रुपये का बजट भी प्राप्त हुआ था।
अंगदान की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए राज्य सरकार ने प्राधिकार समिति, सलाहकार समिति और पर्यवेक्षी समिति जैसी विभिन्न समितियों का गठन किया है। साथ ही, अंग प्रत्यारोपण के नियमों में समय-समय पर बदलाव भी किए गए हैं, जिसके तहत 2011 के संशोधनों को मार्च 2017 में और 2014 के नियमों को जून 2021 में राज्य में अंगीकृत किया गया है। सरकार वर्तमान में ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर्स के प्रशिक्षण और प्रचार-प्रसार के माध्यम से अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दे रही है।



