रायपुर: छत्तीसगढ़ के विभिन्न विभागों और शासकीय उपक्रमों में प्रशिक्षित अमले और कर्मचारियों की भारी कमी के कारण जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। विधानसभा पटल पर प्रस्तुत शासकीय आंकड़ों के अनुसार, राज्य में प्रशिक्षित स्टाफ सहित विभिन्न श्रेणियों के स्वीकृत पदों में से ४१ प्रतिशत से अधिक पद खाली पड़े हैं। कुल २२,६०५ स्वीकृत पदों में से वर्तमान में केवल १३,२१३ कर्मचारी ही कार्यरत हैं, जबकि ९,३९२ महत्वपूर्ण पद रिक्त पड़े हैं। खाली पदों का यह विशाल आंकड़ा साफ गवाही दे रहा है कि सीमित स्टाफ पर काम का बोझ लगातार बढ़ रहा है, जिससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और आम जनता को मिलने वाली त्वरित सेवाओं पर सीधा और विपरीत असर पड़ रहा है।
सरकारी रिपोर्ट के जिलेवार विश्लेषण से यह चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है कि मैदानी और बड़े जिलों में अमले की सबसे ज्यादा किल्लत है। रायगढ़ जिला पूरे प्रदेश में रिक्तियों के मामले में सबसे शीर्ष पर है, जहाँ १,१५४ स्वीकृत पदों में से ५२१ पद खाली पड़े हैं और केवल ६३३ कर्मचारी ही काम संभाल रहे हैं। वहीं, वनांचल और पहाड़ी क्षेत्रों से घिरे जशपुर जिले में भी हालात बेहद चिंताजनक हैं, जहाँ ९९६ स्वीकृत पदों में से ४३२ पद रिक्त हैं और महज ५६४ कर्मचारियों के भरोसे पूरा जिला टिका हुआ है। राजधानी रायपुर की बात करें तो यहाँ १,०४० स्वीकृत पदों में से ३८८ पद खाली हैं और केवल ६५२ कर्मचारी ही कार्यरत हैं। औद्योगिक नगरी दुर्ग में ९६७ स्वीकृत पदों में से ४२९ पद रिक्त हैं और न्यायधानी बिलासपुर में ९६३ स्वीकृत पदों में से २९९ पदों पर ताला लटका हुआ है, जिससे इन बड़े प्रशासनिक केंद्रों में काम की गति प्रभावित हो रही है।
प्रतिशत के दृष्टिकोण से देखा जाए तो बेमेतरा जिला पूरे छत्तीसगढ़ में सबसे बदहाल स्थिति में है। बेमेतरा में ६८४ स्वीकृत पदों में से ६६.६ प्रतिशत यानी दो-तिहाई पद (४५६ पद) खाली पड़े हैं और केवल २२८ कर्मचारियों के कंधों पर पूरे जिले का बोझ डाल दिया गया है। इसी तरह कवर्धा जिले में भी ५८ प्रतिशत से अधिक पद रिक्त हैं, जहाँ ६८३ पदों में से ३९७ पद खाली हैं और केवल २८६ लोग कार्यरत हैं। कोरबा जिले में भी आधे से अधिक यानी ८४४ स्वीकृत पदों में से ४४२ पद खाली हैं। बस्तर संभाग के जगदलपुर में ९४७ में से ३७८ पद, कोंडागांव में ७०० में से २७५ पद और कांकेर में ९७८ में से २१० पद रिक्त पड़े हैं।
प्रशिक्षित अमले और विभिन्न कर्मचारियों की इस भारी कमी का सीधा असर दफ्तरों की कार्यप्रणाली और शासकीय सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। कई महत्वपूर्ण विभागों में काम करने वाले मौजूदा कर्मचारियों को दोहरे प्रभार और अतिरिक्त काम के दबाव में काम करना पड़ रहा है, जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है और दफ्तरों में आम नागरिकों की फाइलें लंबे समय तक अटकी रह जाती हैं। यह गंभीर स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि जब तक रिक्त पड़े इन ९,३९२ पदों पर नई नियुक्तियां नहीं की जातीं और भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी नहीं लाई जाती, तब तक प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू और सुदृढ़ बनाना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।



