छत्तीसगढ़ में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पुलिस और प्रशासन के द्वारा की जा रही सख्त कार्रवाई का एक बड़ा और आधिकारिक लेखा-जोखा सामने आया है। विधानसभा पटल पर प्रस्तुत वर्ष 2025 से 15 जून 2026 तक के आंकड़ों ने राज्य में गांजा तस्करी के खिलाफ जारी एक बड़े अभियान की हकीकत को उजागर किया है। इन डेढ़ सालों की छोटी सी अवधि में पुलिस ने न केवल हजारों किलोग्राम अवैध गांजा जब्त कर तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त किया है, बल्कि राज्य की सीमाओं और आंतरिक मार्गों पर चौकसी बढ़ाकर सैकड़ों आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया है।
आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ पुलिस ने इस दौरान बड़ी मात्रा में गांजा जब्त करने में सफलता हासिल की है। वर्ष 2025 में पूरे प्रदेश में अवैध गांजा तस्करी के कुल 559 प्रकरण दर्ज किए गए थे, जिसके तहत पुलिस ने 15,001.43 किलोग्राम यानी करीब 15 टन गांजा जब्त किया और 1,081 आरोपियों को गिरफ्तार किया। वहीं, वर्ष 2026 के शुरुआती साढ़े पांच महीनों में ही यानी 15 जून तक पुलिस ने और अधिक मुस्तैदी दिखाते हुए कुल 411 प्रकरण दर्ज किए, जिसके तहत तस्करों के कब्जे से रिकॉर्ड 17,248.38 किलोग्राम यानी 17 टन से भी अधिक गांजा जब्त कर लिया गया और 894 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इन आंकड़ों से साफ है कि इस साल महज कुछ ही महीनों में पिछले पूरे साल की तुलना में ज्यादा अवैध खेप पकड़ी जा चुकी है।
जिलेवार विश्लेषण के अनुसार, महासमुंद जिला गांजा तस्करी का सबसे बड़ा ट्रांजिट रूट बनकर उभरा है, जहां पुलिस ने तस्करों की कमर तोड़ दी है। उड़ीसा सीमा से सटे होने के कारण इस संवेदनशील मार्ग पर साल 2025 में 109 मामले दर्ज कर 3,177.331 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया था और 211 तस्कर पकड़े गए थे। इस साल 2026 में 15 जून तक महासमुंद पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 103 प्रकरणों में अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाते हुए 7,225.351 किलोग्राम गांजा जब्त किया है और 310 आरोपियों को दबोचा है। महासमुंद के बाद रायपुर जिला दूसरे नंबर पर है, जहां साल 2025 में 14 प्रकरणों में 235.479 किलोग्राम गांजा जब्त हुआ था, जबकि साल 2026 में अब तक 19 मामलों में 307.653 किलोग्राम गांजा पकड़ा जा चुका है।
बस्तर संभाग के जगदलपुर (बस्तर) और सुकमा जैसे सीमावर्ती जिलों में भी पुलिस का कड़ा पहरा देखने को मिला है। जगदलपुर में साल 2025 में 63 प्रकरण दर्ज कर 1,060.188 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया और 96 आरोपियों को पकड़ा गया, जबकि साल 2026 में अब तक 30 प्रकरणों में 435.065 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ है। इसी तरह सुकमा जिले में साल 2025 में 21 मामलों में 1,195.470 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया था। उत्तरी छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में भी साल 2025 में 1,719.079 किलोग्राम और साल 2026 में अब तक 1,946.324 किलोग्राम गांजे की भारी जब्ती की गई है, जो यह दर्शाती है कि तस्करों के अंतर्राज्यीय नेटवर्क को तोड़ने के लिए पुलिस हर मोर्चे पर मुस्तैद है।
सीमावर्ती जिलों रायगढ़ और जशपुर में भी अवैध गांजा तस्करी के खिलाफ पुलिस ने कड़ा शिकंजा कसा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, रायगढ़ जिले में साल २०२५ के दौरान गांजा तस्करी के ३४ मामले दर्ज कर ७५१.६९२ किलोग्राम गांजा जब्त किया गया था और ६४ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि साल २०२६ में १५ जून तक यहाँ २८ मामलों में ६०७.६ किलोग्राम गांजा बरामद कर ५३ तस्करों को दबोचा जा चुका है। वहीं दूसरी ओर, जशपुर जिले में साल २०२५ में १५ मामलों के तहत ७२३.३२७ किलोग्राम गांजा जब्त हुआ था और २६ आरोपी पकड़े गए थे, लेकिन इस साल २०२६ में १५ जून तक की स्थिति में बेहद चौंकाने वाली कार्रवाई देखने को मिली है, जहाँ महज ८ मामलों में ही पिछले साल से भी अधिक यानी रिकॉर्ड ७४४.६०५ किलोग्राम गांजा जब्त किया जा चुका है और १९ तस्करों को जेल भेजा गया है। जशपुर का यह आंकड़ा साफ दर्शाता है कि पुलिस ने इस बार छोटी-मोटी चोरियों के बजाय तस्करों के बड़े सिंडिकेट और उनकी भारी खेपों पर सीधा प्रहार कर उनके हौसले पस्त किए हैं।
इस अवैध कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए गृह विभाग और पुलिस प्रशासन द्वारा चौतरफा रणनीति अपनाई जा रही है। पड़ोसी राज्यों की सीमाओं से लगे संवेदनशील इलाकों और चेकपोस्टों पर सीसीटीवी कैमरों की मदद से संदिग्ध वाहनों की सघन चेकिंग की जा रही है। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर युवाओं को नशे के दलदल से बचाने और तस्करों की सूचना पुलिस तक पहुंचाने के लिए कम्युनिटी पुलिसिंग और जन-जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विभाग न केवल गांजे की खेप पकड़ रहा है, बल्कि पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में त्वरित चालान पेश कर कड़ी सजा दिलाने की दिशा में भी काम कर रहा है ताकि मादक पदार्थों के इस काले धंधे पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके।

