देशभर के लाखों छात्रों को प्रभावित करने वाली CBSE Three Language Policy अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। 19 छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के एक समूह ने कक्षा 9 में तीन-भाषा नीति लागू करने के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई कर सकता है। माना जा रहा है कि इस फैसले का असर देशभर के करीब 50 लाख छात्रों पर पड़ सकता है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CBSE ने पहले जारी अपने ही निर्देशों से अलग फैसला लिया है। उनका दावा है कि 9 अप्रैल को बोर्ड ने स्पष्ट किया था कि कक्षा 9 के छात्रों पर तीसरी भाषा का नियम 2029-30 तक लागू नहीं होगा, लेकिन बाद में 15 मई को जारी सर्कुलर में इसे 2026-27 सत्र से अनिवार्य कर दिया गया।
याचिका में क्या हैं मुख्य आपत्तियां?
याचिकाकर्ताओं ने CBSE और NCERT के फैसले को मनमाना बताते हुए कई सवाल उठाए हैं।
- प्रशिक्षित भाषा शिक्षकों की कमी।
- कई भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें अभी उपलब्ध नहीं।
- स्कूलों पर जल्दबाजी में नियम लागू करने का दबाव।
- नई शिक्षा नीति (NEP 2020) की भावना के खिलाफ होने का आरोप।
याचिका में यह भी कहा गया है कि केवल नया विषय जोड़ देना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की गारंटी नहीं है, जब तक उसके लिए आवश्यक संसाधन और शिक्षक उपलब्ध न हों।
CBSE Three Language Policy में क्या है नया नियम?
CBSE के 15 मई के सर्कुलर के अनुसार, 2026-27 सत्र से कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होगा। इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होंगी। हालांकि इस वर्ष 10वीं बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा का अलग प्रश्नपत्र नहीं लिया जाएगा, लेकिन उसकी पढ़ाई करना जरूरी रहेगा।
बोर्ड ने यह भी स्वीकार किया है कि कुछ स्कूलों में योग्य भाषा शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में हाइब्रिड टीचिंग, इंटर-स्कूल सहयोग और सेवानिवृत्त शिक्षकों की नियुक्ति जैसे विकल्प दिए गए हैं।
NEP 2020 और विवाद की वजह
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि NEP 2020 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी भी छात्र या राज्य पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी। इसी आधार पर उन्होंने CBSE के सर्कुलर को नीति की मूल भावना के विपरीत बताया है।
वहीं CBSE का कहना है कि यह निर्णय नए NCERT पाठ्यक्रम और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप लिया गया है। बोर्ड 19 भारतीय भाषाओं की नई किताबें भी तैयार कर रहा है।
आगे क्या होगा?
- सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह मामले की सुनवाई कर सकता है।
- जस्टिस जॉयमाल्या और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ इस याचिका पर विचार करेगी।
- कोर्ट के फैसले के बाद देशभर के CBSE स्कूलों में CBSE Three Language Policy के लागू होने की दिशा तय होगी।
फिलहाल स्कूलों और अभिभावकों की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है, क्योंकि इसका सीधा असर लाखों छात्रों की पढ़ाई और शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ सकता है। ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए हमें Facebook और Instagram पर फॉलो करें।

