रायपुर बरसात की पहली फुहार जहां खेतों में हरियाली और किसानों के चेहरों पर उम्मीद लेकर आती है, वहीं इस मौसम में खेतों, मेड़ों, जंगलों और घरों के आसपास सांपों का निकलना भी आम हो जाता है। लेकिन इस दौरान सबसे बड़ी चिंता वो देरी है, जो लोग इलाज कराने के बजाय झाड़-फूंक और अंधविश्वास के चक्कर में कर देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक सर्पदंश से होने वाली अधिकांश मौतें जहर से कम और सही समय पर उपचार न मिलने के कारण होती हैं। इसलिए किसी भी तरह के अंधविश्वास में समय गंवाने के बजाय मरीज को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना ही उसकी जान बचाने का सबसे सही उपाय है।
चुनौती से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयार
इसी गंभीर चुनौती को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने इस साल भी इलाज की व्यवस्था को बेहद मजबूत बनाए रखा है। प्रदेश के सभी 33 जिलों के जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य संस्थानों में पॉलीवैलेंट एंटी स्नेक वेनम (ASV) का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया गया है। वर्तमान में पूरे प्रदेश में 1,00,960 वायल एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध हैं। यह स्टॉक जिलों की जरूरत, पिछले सालों में सामने आए सर्पदंश के मामलों और संवेदनशील इलाकों को ध्यान में रखकर बांटा गया है, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में मरीज का इलाज बिना एक पल गंवाए तुरंत शुरू किया जा सके।
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संवेदनशील जिलों में भेजा गया विशेष स्टॉक
स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, सांपों के लिहाज से संवेदनशील और दूरस्थ जिलों में विशेष रूप से बड़ा स्टॉक भेजा गया है। इनमें रायगढ़ में 6,401, बलरामपुर में 6,280, जशपुर में 6,063, सूरजपुर में 6,002, कोरबा में 4,847, दुर्ग में 4,351, कवर्धा में 4,286, अंबिकापुर में 4,269, बीजापुर में 4,049, महासमुंद में 3,656 और कांकेर में 3,547 वायल शामिल हैं। राज्य के बाकी सभी जिलों में भी वहां की स्थानीय आवश्यकता के अनुसार दवाओं का पर्याप्त बैकअप रखा गया है और जरूरत पड़ने पर तुरंत अतिरिक्त आपूर्ति की व्यवस्था भी की गई है।
लक्षणों को पहचानें और इन गलतियों से बचें
विशेषज्ञों का कहना है कि सभी सांप जहरीले नहीं होते, लेकिन यदि सांप के काटने के बाद शरीर पर दो दांतों के निशान दिखाई दें, उस जगह से खून बहे या सूजन आने लगे, पलकें झुकने लगें, धुंधला दिखाई दे या सांस लेने में तकलीफ हो, तो इसे गंभीरता से लें। ऐसी स्थिति में 108 एम्बुलेंस सेवा की मदद लेकर तुरंत सरकारी अस्पताल पहुंचें। सर्पदंश होने पर प्रभावित अंग पर चीरा लगाना, मुंह से जहर चूसने की कोशिश करना, बहुत कसकर रस्सी बांधना या झाड़-फूंक करना वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह गलत है और यह मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। मरीज को बिल्कुल शांत रखें, उसे हिलने-डुलने न दें और सीधे डॉक्टर के पास ले जाएं।
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे बरसात के मौसम में खेतों या जंगलों में काम करते समय ऊंचे जूते पहनें, रात में बाहर निकलते वक्त टॉर्च का इस्तेमाल करें, घर के आसपास उगी झाड़ियों की सफाई रखें और जमीन पर सीधे सोने से बचें। इन छोटी-छोटी सावधानियों से सर्पदंश के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के सभी अस्पतालों में प्रशिक्षित डॉक्टरों और पर्याप्त दवाओं की समुचित व्यवस्था है, इसलिए झाड़-फूंक के चक्कर में कीमती समय बर्बाद न करें।


