अब आपके शहर से भी उड़ेगा विमान! 10 साल के लिए ‘उड़ान’ योजना का नया अवतार; छोटे शहरों में एयर कनेक्टिविटी के लि 100 नए एयरपोर्ट और 200 हेलीपैड को मिली हरी झंडी,

अम्बिकापुर, 30 मार्च 2026

उत्तर छत्तीसगढ़ के विकास के आकाश में आज एक नया सितारा जुड़ने जा रहा है। सरगुजा संभाग का दशकों पुराना सपना सच हो रहा है। आज, 30 मार्च को माँ महामाया एयरपोर्ट, दरिमा (अम्बिकापुर) से देश के दो बड़े महानगरों—दिल्ली और कोलकाता—के लिए नियमित हवाई सेवा का विधिवत आगाज़ होने जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज प्रातः 10:00 बजे रायपुर से वर्चुअल माध्यम से इस सेवा का शुभारंभ करेंगे। इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए अम्बिकापुर के पी.जी. कॉलेज ऑडिटोरियम में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जिसमें क्षेत्रीय सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि और भारी संख्या में आम नागरिक उपस्थित रहेंगे।

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माँ महामाया एयरपोर्ट अब आधुनिक सुविधाओं के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है, जिसे केंद्र सरकार की ‘उड़ान’ (UDAN) योजना के तहत वैश्विक मानकों के अनुरूप बेहद संजीदगी से तैयार किया गया है। लगभग 365 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैले इस एयरपोर्ट परिसर का कायाकल्प करने के लिए सिविल और विद्युतीकरण कार्यों हेतु ₹48.25 करोड़ की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई थी, जिससे यहाँ की अधोसंरचना को एक नई मजबूती मिली है।

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इस विकास कार्य के अंतर्गत रनवे की लंबाई को 1500 मीटर से बढ़ाकर 1800 मीटर कर दिया गया है, जिससे अब एटीआर जैसे बड़े विमानों का संचालन यहाँ सुगमता से हो सकेगा। यात्रियों की सुविधा के लिए यहाँ 72 सीटों की क्षमता वाला एक भव्य और आधुनिक टर्मिनल भवन बनाया गया है, जहाँ यात्रियों को विश्वस्तरीय अनुभव मिलेगा। इसके अलावा, सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के लिए हवाई अड्डे तक फोरलेन सड़क का निर्माण किया गया है और परिसर के भीतर एक साथ 100 वाहनों की पार्किंग की व्यवस्थित जगह तैयार की गई है। यह पूरी परियोजना न केवल तकनीक बल्कि कनेक्टिविटी के लिहाज से भी उत्तर छत्तीसगढ़ के लिए एक मिसाल पेश करती है।

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सरगुजा और जशपुर के लिए यह हवाई सेवा केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि विकास की एक ऐसी नई इबारत है जो इस पूरे अंचल की तस्वीर बदल देगी। माँ महामाया एयरपोर्ट से दिल्ली और कोलकाता के लिए उड़ने वाले विमान उत्तर छत्तीसगढ़ की दुर्गमता के कलंक को मिटाकर इसे सीधे देश के मुख्य आर्थिक केंद्रों से जोड़ देंगे।

सबसे बड़ा परिवर्तन पर्यटन और आस्था के क्षेत्र में देखने को मिलेगा। अब तक जशपुर की प्राकृतिक सुंदरता केवल क्षेत्रीय लोगों तक सीमित थी, लेकिन अब दुनिया भर के पर्यटक मयाली की शांति और देशदेखा के अद्भुत नजारों का दीदार कर सकेंगे। आस्था के केंद्र मदेश्वर महादेव, जहाँ विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग विराजमान है, वहाँ अब देशभर के श्रद्धालु सुगमता से पहुँच सकेंगे। इसी तरह, एशिया का सबसे बड़ा चर्च (कुनकुरी), राजपुरी और रानीदह जैसे जलप्रपात और कोटेबिरा की प्राकृतिक छटा अब अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर चमक उठेगी। जब बाहरी पर्यटक यहाँ आएंगे, तो स्थानीय संस्कृति और लोक कलाओं को भी नई पहचान मिलेगी।

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आर्थिक और सामाजिक स्तर पर यह कनेक्टिविटी सरगुजा और जशपुर के स्थानीय उत्पादों के लिए ‘संजीवनी’ साबित होगी। यहाँ के किसानों द्वारा उत्पादित चाय, काजू, वनोपज और प्रसिद्ध जीरा फूल चावल अब दिल्ली और कोलकाता जैसे महानगरों की थाली तक सीधे पहुँच सकेंगे। बेहतर परिवहन सुविधा होने से बड़े निवेशक इस क्षेत्र में उद्योग लगाने के लिए आकर्षित होंगे, जिससे स्थानीय युवाओं को घर के पास ही सम्मानजनक रोजगार मिलेगा और पलायन पर रोक लगेगी। होटल्स, टैक्सी और गाइड सेवाओं के विस्तार से एक मजबूत स्थानीय अर्थव्यवस्था खड़ी होगी।

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इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य सेवाओं में यह सेवा एक ‘लाइफ-सेविंग लिंक’ की तरह काम करेगी। जशपुर और सरगुजा के दूरस्थ अंचलों में रहने वाले गंभीर मरीजों को अब विशेषज्ञ इलाज के लिए घंटों का सफर तय नहीं करना पड़ेगा; उन्हें चंद घंटों में दिल्ली या कोलकाता के वर्ल्ड-क्लास अस्पतालों तक पहुँचाया जा सकेगा। अंततः, यह हवाई सेवा सरगुजा को एक प्रशासनिक केंद्र से ऊपर उठाकर एक आधुनिक ‘इकोनॉमिक और टूरिज्म हब’ के रूप में स्थापित करेगी, जिससे पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ेगा।

हवाई सेवाओं का यह नया शेड्यूल सरगुजा संभाग के यात्रियों के लिए समय और सुविधा का एक बेहतरीन तालमेल लेकर आया है। एलायंस एयर द्वारा संचालित 72-सीटर एटीआर विमान इन रूटों पर अपनी सेवाएं देंगे, जिससे न केवल दिल्ली और कोलकाता जैसे महानगरों की दूरी सिमट जाएगी, बल्कि बिलासपुर के साथ भी एक मजबूत हवाई सेतु तैयार होगा।

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दिल्ली-अम्बिकापुर हवाई मार्ग (सप्ताह में दो दिन: सोमवार और बुधवार) राजधानी दिल्ली से जुड़ने के लिए सप्ताह में दो दिन विशेष विमान सेवाएं निर्धारित की गई हैं। सोमवार को यह विमान सुबह 7:50 बजे दिल्ली से उड़ान भरकर 10:25 बजे बिलासपुर पहुंचेगा और फिर वहां से रवाना होकर सुबह 11:35 बजे अम्बिकापुर में उतरेगा। वापसी में यही फ्लाइट दोपहर 12:05 बजे अम्बिकापुर से सीधे उड़ान भरेगी और दोपहर 2:35 बजे यात्रियों को दिल्ली पहुंचा देगी। वहीं बुधवार के दिन दिल्ली से सुबह 7:50 बजे निकलने वाली फ्लाइट सीधे 10:25 बजे अम्बिकापुर पहुंचेगी। इसके बाद यह अम्बिकापुर से 10:50 बजे प्रस्थान कर 11:35 बजे बिलासपुर पहुंचेगी और अंततः दोपहर 2:40 बजे दिल्ली में अपना सफर पूरा करेगी।

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कोलकाता-अम्बिकापुर हवाई मार्ग (सप्ताह में दो दिन: शनिवार और गुरुवार) पूर्वी भारत के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र कोलकाता से कनेक्टिविटी के लिए गुरुवार और शनिवार के दिन तय किए गए हैं। गुरुवार को कोलकाता से सुबह 7:05 बजे सीधी उड़ान भरकर विमान सुबह 8:50 बजे अम्बिकापुर पहुंचेगा। इसके बाद अम्बिकापुर से 9:15 बजे प्रस्थान कर यह पहले बिलासपुर जाएगा और फिर वहां से उड़कर दोपहर 12:05 बजे वापस कोलकाता पहुंचेगा। इसी तरह शनिवार को सुबह 7:05 बजे कोलकाता से निकलने वाली फ्लाइट पहले बिलासपुर रुकेगी और सुबह 10:00 बजे अम्बिकापुर पहुंचेगी। वापसी का सफर अम्बिकापुर से सुबह 10:25 बजे शुरू होगा, जो दोपहर 12:15 बजे यात्रियों को कोलकाता पहुंचा देगा।

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यह सुनियोजित शेड्यूल न केवल यात्रियों को आने-जाने के लिए सुविधाजनक विकल्प प्रदान करता है, बल्कि बिलासपुर और अम्बिकापुर के बीच के हवाई संपर्क को भी एक नई दिशा देता है, जिससे पूरे क्षेत्र की व्यापारिक और सामाजिक गतिविधियां और भी तेज हो जाएंगी।

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