8वां वेतन आयोग: कर्मचारियों को लग सकता है बड़ा झटका, बड़ी मांगों पर पानी फेरने की तैयारी में सरकार
विशेष ब्यूरो
नई दिल्ली।
देश में बढ़ती महंगाई का असर अब सिर्फ पेट्रोल-डीजल की कीमतों तक सीमित नहीं रह गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और आयातित कच्चे माल की कीमतों में उछाल के चलते अब घरेलू बाजार में भी निर्माण लागत (Production Cost) बढ़ गई है। इसका सीधा और घातक असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। सुबह की चाय से लेकर रात के खाने तक, और घर की रसोई से लेकर खुद का मकान बनाने तक—हर मोर्चे पर आम आदमी की जेब ढीली हो रही है।बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यदि कच्चे माल की कीमतों में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में खुदरा महंगाई आम जनता की कमर पूरी तरह तोड़ देगी।
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परिवहन लागत बढ़ने से एफएमसीजी (FMCG) उत्पाद हुए महंगे
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगी आग ने लॉजिस्टिक्स और परिवहन खर्च में भारी इजाफा कर दिया है। मालभाड़ा महंगा होने का सीधा असर रोजाना उपयोग होने वाले (FMCG) उत्पादों पर साफ दिखाई दे रहा है। पैक्ड फूड, खाद्य तेल, साबुन, शैम्पू और घरेलू उपयोग की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।
इसके अलावा, कमर्शियल गैस सिलिंडर की कीमतों में हुई वृद्धि ने होटल और रेस्तरां कारोबारियों को भी दाम बढ़ाने पर मजबूर कर दिया है। बाजार में आम आदमी का पसंदीदा नाश्ता समोसा और कचौड़ी, जो पहले 10 से 15 रुपये में मिलते थे, अब बढ़कर 15 से 20 रुपये तक बिक रहे हैं। वहीं होटलों में मिलने वाली भोजन की थाली, दोसा और अन्य खाद्य पदार्थों के दामों में सीधे 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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रसोई का बदला गणित: तेल और डेयरी उत्पादों ने रुलाया
महंगाई की सबसे बड़ी मार घरेलू रसोई पर पड़ी है, जिसने गृहणियों का पूरा बजट बिगाड़ कर रख दिया है। कुछ समय पहले तक 130 रुपये प्रति लीटर मिलने वाला सोयाबीन तेल अब 160 रुपये तक पहुंच गया है, जबकि राइस ब्रान तेल भी 155 रुपये प्रति लीटर के स्तर को छू रहा है। दूध के दामों में हाल ही में हुई वृद्धि के कारण दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद भी आम आदमी की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं।
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महंगाई का पूरा गणित: एक नजर में (बाजार भाव तुलनात्मक चार्ट)
सामग्री पहले की औसत कीमत (₹) वर्तमान औसत कीमत (₹) असर / वृद्धि खाद्य तेल और मसाले (किचन बास्केट) सोयाबीन तेल (प्रति लीटर) ₹130 ₹160 ₹30 की सीधी बढ़ोतरी राइस ब्रान तेल (प्रति लीटर) ₹125 ₹155 ₹30 महंगा पैक्ड मसाले (प्रति 100 ग्राम) ₹40 – ₹45 ₹55 – ₹60 25% तक का उछाल डेयरी उत्पाद (दूध और अन्य) फुल क्रीम दूध (प्रति लीटर) ₹64 ₹68 ₹4 प्रति लीटर बढ़ा पनीर (प्रति किलो) ₹400 – ₹420 ₹480 ₹60 से ₹80 की तेजी पैक्ड दही (प्रति किलो) ₹80 ₹100 – ₹110 ₹20 से ₹30 महंगा सब्जियां (मंडी भाव) टमाटर (प्रति किलो) ₹20 – ₹25 ₹40 – ₹50 दाम दोगुने हुए हरी मिर्च (प्रति किलो) ₹40 – ₹50 ₹80 तीखा हुआ स्वाद फ्रेंच बींस (प्रति किलो) ₹90 – ₹100 ₹160 रिकॉर्ड स्तर पर नींबू (प्रति किलो) ₹60 – ₹70 ₹120 – ₹140 आसमान पर दाम आलू / प्याज (प्रति किलो) ₹20 ₹30 – ₹35 मिडिल क्लास पर बोझ मकान निर्माण सामग्री (Building Materials) सीमेंट (प्रति बोरी) ₹340 – ₹360 ₹410 – ₹430 प्रति बोरी ₹70 तक महंगी छड़ / सरिया (प्रति टन) ₹52,000 ₹62,000 – ₹65,000 ₹10,000 से ज्यादा का उछाल गिट्टी (प्रति ब्रास / ट्रैक्टर) ₹3,200 ₹4,000 – ₹4,500 कंस्ट्रक्शन कॉस्ट बढ़ी बालू / रेत (प्रति ट्रक/ट्रैक्टर) ₹2,500 ₹3,500 – ₹4,000 परिवहन खर्च का असर विट्रीफाइड टाइल्स (प्रति वर्गफीट) ₹40 – ₹50 ₹60 – ₹75 आशियाना सजाना हुआ महंगा मकान निर्माण लागत (ओवरऑल) ₹1200 – ₹1300 / वर्गफीट ₹1400 – ₹1500 / वर्गफीट ₹200/वर्गफीट की कुल बढ़ी लागत इलेक्ट्रॉनिक्स और लाइफस्टाइल 1.5 टन स्प्लिट एसी (3 स्टार) ₹40,000 ₹48,000 कॉपर-मेटल महंगे होने का असर रेफ्रिजरेटर (फ्रिज – मध्यम आकार) ₹22,000 ₹26,500 ₹4,500 तक की बढ़ोतरी रेडीमेड कपड़े (औसतन) — — 20% से 25% तक म
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थाली से गायब हो रही रंगत, सब्जियां और पैकिंग सामग्री भी तेज
भीषण गर्मी और बढ़ते परिवहन खर्च के दोहरे झटके के कारण हरी सब्जियों के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं। रिटेल मार्केट में टमाटर 40 से 50 रुपये किलो, हरी मिर्च 80 रुपये किलो और फ्रेंच बींस रिकॉर्ड 160 रुपये किलो तक बिक रही है। नींबू, भिंडी और करेला जैसी मौसमी सब्जियों के दाम भी सामान्य से दोगुने हो चुके हैं।
दूसरी ओर, वैश्विक स्तर पर प्लास्टिक दाना और स्क्रैप महंगा होने से पैकिंग सामग्री, पाउच और सिंगल यूज प्लास्टिक उत्पादों की कीमतों में 20 से 50 प्रतिशत तक का उछाल आया है। यही वजह है कि पैकेट बंद साबुन, डिटर्जेंट, नमकीन और चिप्स के न सिर्फ दाम बढ़े हैं, बल्कि कंपनियों ने उनकी मात्रा (वजन) भी कम कर दी है।
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आशियाना बनाना हुआ महंगा, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक्स भी हुए दूर
यदि आप इस सीजन में अपना खुद का मकान बनाने की सोच रहे हैं, तो आपको अपनी जेब और ढीली करनी होगी। सीमेंट, सरिया (लोहा), गिट्टी और रेत की कीमतें बढ़ने से मकान निर्माण लागत में बड़ा उछाल आया है। पहले जहाँ औसतन निर्माण लागत 1200 से 1300 रुपये प्रति वर्गफीट आती थी, वह अब बढ़कर 1400 से 1500 रुपये प्रति वर्गफीट तक पहुंच गई है।
इसके साथ ही, कॉपर (तांबा), एल्युमिनियम और अन्य धातुओं के अंतरराष्ट्रीय दाम बढ़ने से घरेलू उपकरण जैसे एसी, फ्रिज, वाशिंग मशीन और अन्य बिजली के सामान महंगे हो गए हैं। उदाहरण के तौर पर, जो एसी पहले 40 हजार रुपये में मिल जाता था, उसकी कीमत अब बढ़कर करीब 48 हजार रुपये हो चुकी है। कॉटन और कपड़ा मिलों की बढ़ती लागत के कारण रेडीमेड कपड़ों के दामों में भी 20 से 25 प्रतिशत तक का इजाफा देखा जा रहा है, जिससे मिडिल क्लास का पूरा वित्तीय नियोजन गड़बड़ा गया है।

