अगर आप भी अब तक मामूली सर्दी-खांसी या किसी अन्य बीमारी में पास के मेडिकल स्टोर से सीधे जाकर ऐसी सिरप या लिक्विड दवाएं उठा लाते थे जिनमें अल्कोहल होता है, तो यह खबर आपकी जेब और सेहत दोनों के लिए बेहद जरूरी है। देश में दवाओं के बेजा इस्तेमाल और नशे के रूप में उनके बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (Union Health Ministry) ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने दवा नियमों में ‘दसवां संशोधन’ (10th Amendment) जारी कर दिया है, जो सरकारी गजट में प्रकाशित होने के ठीक छह महीने बाद पूरे देश में पूरी तरह से प्रभावी और लागू हो जाएगा। इस नए कड़े कदम के बाद अब बिना डॉक्टर के पर्ची (Prescription) के कई पॉपुलर सिरप और ओरल लिक्विड्स को खरीदना पूरी तरह नामुमकिन हो जाएगा।
इस नए संशोधन के तहत सरकार ने साफ किया है कि 30 एमएल (30 ml) से बड़ी पैकिंग वाली और 12 फीसदी से ज्यादा एथिल अल्कोहल (Ethyl Alcohol) कंसंट्रेशन वाली सभी ओरल दवाओं को अब सीधे ‘शेड्यूल H1’ (Schedule H1) कैटेगिरी में शामिल कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब ये दवाएं केवल और केवल रजिस्टर्ड डॉक्टर के ऑफिशियल प्रिस्क्रिप्शन पर ही रिटेल काउंटर से बेची जा सकेंगी। इतना ही नहीं, मेडिकल स्टोर संचालकों को इन दवाओं की एक-एक बोतल की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड और खरीदार का डेटा निर्धारित नियमों के अनुसार अपने पास मेंटेन करके रखना होगा। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा ड्रग्स रूल्स, 1945 (Drugs Rules, 1945) में किए गए इस बड़े फेरबदल का एकमात्र विजन उन सिरप और टिंचर्स के गलत इस्तेमाल (Misuse) को पूरी तरह से ब्लॉक करना है, जिन्हें लोग इलाज के बजाय नॉन-मेडिकल इस्तेमाल यानी नशे के तौर पर कंज्यूम कर रहे थे।
हैरान करने वाली बात यह है कि अभी तक कुछ खास आयुर्वेदिक दवाओं जैसे इलायची, अदरक और अन्य सुगंधित टिंचर को ‘शेड्यूल-के’ (Schedule K) के तहत ड्रग लाइसेंस की अनिवार्यता से पूरी छूट मिली हुई थी, जिसका फायदा उठाकर धड़ल्ले से बाजार में ऐसी दवाएं बिक रही थीं जिनमें 80 से 90 प्रतिशत तक एथिल अल्कोहल होता था। इस गंभीर लूपहोल को लेकर कई राज्य सरकारों ने भी केंद्र से चिंता जताई थी, जिसके बाद अब 12% से अधिक अल्कोहल और 30 एमएल से बड़ी पैकिंग वाली इन सभी दवाओं से शेड्यूल-के की छूट हमेशा के लिए छीन ली गई है। अब इनके निर्माण (Manufacturing) और बिक्री के लिए ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत लाइसेंस लेना पूरी तरह अनिवार्य होगा। इससे पहले सरकार ने 16 जून को भी एक बड़ा नोटिफिकेशन जारी कर कफ सिरप (Cough Syrup) समेत सभी लिक्विड दवाओं को बिना पर्ची के बेचने पर पूरी पाबंदी लगा दी थी। सरकार का मानना है कि इस दोहरे कड़े नियमन से देश का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और ड्रग रेगुलेशन सिस्टम और ज्यादा मजबूत होगा तथा दवाओं के सही और सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

