मध्यप्रदेश के शासकीय कर्मचारियों में लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले नौ माह से राज्य के कर्मचारी 2 प्रतिशत लंबित महंगाई भत्ता (DA) बढ़ाने, अनुकंपा नियुक्ति और पदोन्नति (प्रमोशन) में सीपीसीटी (CPCT) की अनिवार्यता समाप्त करने सहित कई बुनियादी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। सरकार द्वारा इन मुद्दों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिए जाने के विरोध में कर्मचारियों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
आगामी रणनीति तय करने के लिए 20 सितंबर को राजधानी भोपाल में तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ की प्रदेश महासमिति की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में प्रदेश भर के कर्मचारी प्रतिनिधि शामिल होंगे और शासन के उदासीन रवैये के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेंगे।
संघ के प्रांतीय महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं अनुकंपा नियुक्ति और पदोन्नति में सीपीसीटी की अनिवार्यता समाप्त करने के निर्देश सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को दे चुके हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है और विभाग ने अब तक इस संबंध में न तो कोई औपचारिक आदेश जारी किया है और न ही कोई स्पष्टीकरण दिया है। आदेश में हो रही लगातार देरी से प्रभावित कर्मचारियों और आश्रित परिवारों में गहरा असंतोष है।
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि महंगाई के इस दौर में डीए में बढ़ोतरी न होने से कर्मचारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, वहीं सीपीसीटी के तकनीकी पेच के कारण सैकड़ों पात्र कर्मचारियों की पदोन्नति और दिवंगत कर्मचारियों के परिजनों की अनुकंपा नियुक्तियां लंबे समय से अटकी पड़ी हैं। 20 सितंबर को भोपाल में होने वाली महासमिति की बैठक में यदि सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत नहीं मिलते हैं, तो संघ प्रदेशव्यापी आंदोलन और कार्य बहिष्कार जैसे कड़े कदमों का ऐलान कर सकता है।























