नई दिल्ली: भारत को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक सुरक्षित और स्वागतयोग्य गंतव्य बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई और समावेशी रणनीति तैयार की है। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान जानकारी दी कि देश के पर्यटन अनुभव को विश्वस्तरीय बनाने के लिए अब स्थानीय समुदायों को सीधे तौर पर ‘पर्यटन मित्र’ और ‘पर्यटन दीदी’ जैसी पहलों से जोड़ा जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य न केवल पर्यटकों को बेहतरीन मेहमाननवाजी प्रदान करना है, बल्कि स्थानीय कैब चालकों, ऑटो चालकों, होटल कर्मचारियों, दुकानदारों और यहाँ तक कि पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षित करना है ताकि वे पर्यटकों की सुरक्षा, स्वच्छता और सहायता के लिए एक भरोसेमंद सेतु बन सकें।
इस मिशन के तहत कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसका सीधा लाभ ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं और महिलाओं को मिल रहा है। ‘सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण’ (CBSP) योजना के माध्यम से पिछले पाँच वर्षों में 1.68 लाख से अधिक व्यक्तियों को आतिथ्य सत्कार और पर्यटन संबंधी पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षित किया गया है। क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा किए गए मूल्यांकन के अनुसार, इस पहल ने न केवल पर्यटन कार्यबल को मजबूत किया है, बल्कि लगभग 36,000 से अधिक लोगों को सम्मानजनक रोजगार और स्वरोजगार से भी जोड़ा है। सरकार ने इसके लिए इंडियन होटल्स कंपनी (ताज), मैरियट और आईटीसी जैसे दुनिया के 8 प्रमुख होटल समूहों के साथ समझौता भी किया है ताकि प्रशिक्षण के स्तर को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रखा जा सके।
बुनियादी ढांचे के विकास के मोर्चे पर, ‘स्वदेश दर्शन’ योजना को अब अधिक टिकाऊ और जिम्मेदार पर्यटन की ओर मोड़ते हुए ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ के रूप में नया रूप दिया गया है। इसके अंतर्गत 2,208 करोड़ रुपये से अधिक की 53 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जो पर्यावरण के अनुकूल सामग्री और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग पर केंद्रित हैं। साथ ही, ‘चुनौती आधारित गंतव्य विकास’ के तहत आध्यात्मिक, विरासत और पर्यावरण पर्यटन श्रेणियों में 38 अन्य परियोजनाओं को भी हरी झंडी दिखाई गई है। इन साझा प्रयासों और ‘ट्रैवल फॉर लाइफ’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार का लक्ष्य एक ऐसा पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है, जहाँ पर्यटकों को उच्चतम स्तर की देखभाल मिले और स्थानीय समुदायों का आर्थिक विकास सुनिश्चित हो सके।

