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रायपुर: राशन कार्ड धारकों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन लेने की व्यवस्था में शासन ने बड़ा फेरबदल किया है। अब बढ़ती उम्र, गंभीर बीमारी या दिव्यांगता के कारण जिन बुजुर्गों और असमर्थ हितग्राहियों के अंगूठे या आंख के निशान (बायोमेट्रिक) मशीन में स्कैन नहीं हो पाते हैं, उन्हें राशन से वंचित नहीं होना पड़ेगा। ऐसे नागरिकों की सुविधा के लिए अब ‘उत्तराधिकारी’ यानी ‘नामिनी’ (Nominee) की नई व्यवस्था शुरू की गई है। इसके साथ ही, राशन वितरण में होने वाले फर्जीवाड़े और गड़बड़ियों को रोकने के लिए विभाग ने मोबाइल ओटीपी (OTP) के जरिए राशन देने की पुरानी व्यवस्था पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
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खाद्य विभाग की नई गाइडलाइन के अनुसार, 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग, दिव्यांग, बिस्तर पर पड़े बीमार या किसी अन्य जायज कारण से उचित मूल्य दुकान (कंट्रोल) तक नहीं पहुंच पाने वाले हितग्राही अपने स्थान पर परिवार के किसी सदस्य को अधिकृत नामिनी बना सकेंगे। इसके लिए हितग्राहियों को पहले पंजीकरण कराना होगा, जिसके बाद वह तय नामिनी दुकान जाकर अपने खुद के बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए राशन प्राप्त कर सकेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि विभागीय आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में करीब पांच प्रतिशत राशन का उठाव ओटीपी के माध्यम से हो रहा था, जिसमें कई जगहों पर गलत इस्तेमाल और हेरफेर की शिकायतें मिल रही थीं।
इसी गड़बड़ी की आशंका को खत्म करने और पूरी प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह व प्रभावी बनाने के लिए ओटीपी सिस्टम पर अंकुश लगाया गया है। जिला खाद्य अधिकारी के अनुसार, इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी गरीब या असमर्थ हकदार का राशन कोई दूसरा न हड़प सके और वास्तविक हितग्राहियों तक सीधे लाभ पहुंचे। शासन ने सभी सक्षम और पात्र आम हितग्राहियों से अपील की है कि वे स्वयं दुकान पहुंचकर बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद ही अपना राशन लें, जबकि असमर्थ लोग परेशानी से बचने के लिए जल्द से जल्द नामिनी का विकल्प चुन लें।

