बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारियों को पात्रता से अधिक भुगतान की गई ग्रेच्युटी राशि की वसूली के खिलाफ दायर दो अलग-अलग याचिकाओं को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि केवल विभागीय त्रुटि से अतिरिक्त राशि का भुगतान हो जाने के आधार पर किसी कर्मचारी को सरकारी धन अपने पास रखने का कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पात्रता से अधिक भुगतान की गई सरकारी राशि की वसूली करना एक सामान्य नियम है, जबकि वसूली से राहत या छूट केवल सीमित और असाधारण परिस्थितियों में ही दी जा सकती है।
छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में ‘पति/परिजन संस्कृति’ पर लगाम, सरकार ने प्रतिनिधि बनाने पर लगाई रोक
क्या हैं दोनों मामले?
पहला मामला (कालीराम कुर्रे):
मुंगेली जिले के ग्राम रामकापा निवासी 64 वर्षीय कालीराम कुर्रे 30 जून 2024 को सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के दौरान उन्हें ग्रेच्युटी का भुगतान किया गया, लेकिन बाद में गणना की जांच में उन्हें पात्रता से अधिक राशि मिलने का खुलासा हुआ। विभाग ने 5 जून 2026 को अतिरिक्त राशि की वसूली का आदेश जारी किया।
दूसरा मामला (शंकर दास धिरही):
मुंगेली निवासी 63 वर्षीय शंकर दास धिरही 31 जनवरी 2025 को सेवानिवृत्त हुए थे। इन्हें भी वास्तविक पात्रता से अधिक ग्रेच्युटी दी गई थी, जिसके खिलाफ विभाग ने 5 जून 2026 को वसूली का आदेश जारी किया था।
दोनों ही कर्मचारियों ने विभाग के वसूली आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
Sarkari Naukri 2026:अगस्त में सरकारी नौकरी की बंपर वैकेंसी, MPESB से SBI तक इन पदों पर करें आवेदन
याचिकाकर्ताओं की दलील और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
याचिकाकर्ताओं (कालीराम कुर्रे की ओर से अधिवक्ता प्रमोद रामटेके) ने सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध ‘स्टेट ऑफ पंजाब बनाम रफीक मसीह (2015)’ मामले का हवाला दिया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कर्मचारी की किसी धोखाधड़ी या गलती के बिना अतिरिक्त भुगतान हुआ है, तो सेवानिवृत्ति के एक वर्ष बाद उससे वसूली नहीं की जा सकती।
व्याख्याता LB के त्रुटिपूर्ण संविलियन में होगा सुधार: DPI ने जारी किए निर्देश, 10 अगस्त तक मंगाई एकीकृत सूची
राज्य सरकार का पक्ष और हाई कोर्ट का कड़ा रुख
राज्य सरकार ने दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि अतिरिक्त भुगतान कर्मचारियों की वैधानिक पात्रता का हिस्सा नहीं था, इसलिए सरकारी धन को वापस लेना पूरी तरह न्यायसंगत है। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट की एकलपीठ ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण निष्कर्ष दिए:
रफीक मसीह का संरक्षण स्वतः लागू नहीं:
सुप्रीम कोर्ट द्वारा रफीक मसीह मामले में तय किए गए अपवाद प्रत्येक अधिक भुगतान के मामले में अपने आप लागू नहीं होते।
नैतिक और कानूनी दायित्व:
कालीराम कुर्रे के मामले में टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि जब पात्रता से अधिक ग्रेच्युटी खाते में आई, तब कर्मचारी का यह दायित्व था कि वह विभाग को इस त्रुटि की सूचना देता।
धोखाधड़ी का आरोप जरूरी नहीं: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वसूली के लिए कर्मचारी पर गलत सूचना या धोखाधड़ी का आरोप होना अनिवार्य नहीं है। यदि भुगतान कानूनन देय राशि से अधिक है, तो सरकार को वसूली का पूरा अधिकार है।

