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बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी आश्रित ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन कर दिया है और संबंधित विभाग ने उस पर समय पर कोई प्रभावी निर्णय नहीं लिया, तो विभाग अपनी ही प्रशासनिक देरी या चूक का लाभ उठाकर बाद में उस दावे को खारिज नहीं कर सकता।
न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु ने सूरजपुर जिले की निवासी स्नेहलता गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे याची की शैक्षणिक योग्यता के आधार पर किसी स्वीकृत और रिक्त पद पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए नियमानुसार विचार करें।
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क्या है पूरा मामला?
सूरजपुर निवासी स्नेहलता गुप्ता के पति स्वर्गीय शिवसागर गुप्ता पंचायत विभाग में शिक्षाकर्मी ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत थे। सेवाकाल के दौरान 15 अप्रैल 2014 को उनका आकस्मिक निधन हो गया था। पति की मृत्यु के पश्चात स्नेहलता गुप्ता ने नियमों के तहत निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत कर दिया था, जिस पर विभाग की तरफ से समय पर उचित कार्रवाई नहीं की गई थी।























