दिगंबर जैन समाज का पावन पर्युषण (दशलक्षण) महापर्व 16 सितंबर से भक्तिभाव और उल्लास के साथ शुरू होगा। पर्व की तैयारियों को लेकर जिनालयों में प्रतिमाओं के प्रक्षालन व मंजन (शुद्धिकरण) का कार्य विधि-विधान से संपन्न किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रावकों ने सहभागिता की। मंदिरों को आकर्षक रोशनी और फूलों से सजाया जा रहा है।
दस धर्मों की होगी पूजा-अनुमोदना
यह महापर्व आत्मा की शुद्धि और आत्म-चिंतन का काल माना जाता है। पर्व के पहले दिन ‘उत्तम क्षमा’ से शुरुआत होगी। इसके बाद क्रमशः मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन और ब्रह्मचर्य धर्मों की पूजा व अनुमोदना की जाएगी। पूरे दस दिनों तक श्रद्धालु अपनी शक्ति और सामर्थ्य के अनुसार व्रत, उपवास, एकासन और मौन साधना करेंगे।
दैनिक धार्मिक व सांस्कृतिक अनुष्ठान
-
प्रातःकालीन पूजन: सुबह सामूहिक संगीतमय पूजन, शांतिधारा, अभिषेक और मंडल विधान विद्वानों के सानिध्य में संपन्न होंगे।
-
शास्त्र सभा: प्रतिदिन शास्त्र वाचन, प्रवचन और तत्वचर्चा आयोजित की जाएगी।
-
संध्याकालीन कार्यक्रम: शाम को सामूहिक महाआरती, भक्ति संगीत और समाज की युवा व महिला इकाइयों द्वारा ज्ञानवर्धक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे।
25 को अनंत चतुर्दशी पर भव्य शोभायात्रा, 27 सितंबर को क्षमावाणी
महापर्व के दसवें दिन यानी 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर भव्य शोभायात्रा (रथयात्रा) निकाली जाएगी। पालकी व रथ में भगवान को विराजमान कर गाजे-बाजे के साथ नगर भ्रमण कराया जाएगा। इसके उपरांत 27 सितंबर को क्षमापना पर्व (क्षमावाणी) के साथ इस महापर्व का विधिवत समापन होगा, जहाँ सभी एक-दूसरे से वर्षभर में जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए “मिच्छामि दुक्कड़म्” कहकर क्षमा मांगेंगे।























