बिलासपुर:
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने प्रदेश के मौजूदा व पूर्व सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की त्वरित सुनवाई को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायाधीश रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने विभिन्न निचली अदालतों को जनप्रतिनिधियों से जुड़े आपराधिक प्रकरणों का जल्द से जल्द निपटारा करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर ₹200 से अधिक हुआ सस्ता, जानें नई दरें
मामले में न्याय मित्र डॉ. एन.के. शुक्ला ने डिवीजन बेंच को अवगत कराया कि पिछली स्टेटस रिपोर्ट की तुलना में जनप्रतिनिधियों से जुड़े लंबित मामलों में दो प्रकरणों की कमी आई है। रायपुर और कबीरधाम जिले से संबंधित इन दोनों मामलों का इस अवधि के दौरान पूरी तरह से निराकरण कर लिया गया है। डिवीजन बेंच ने इस प्रगति को रिकॉर्ड पर लेते हुए रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई तक सभी संबंधित ट्रायल कोर्ट से अद्यतन और ताजा स्थिति रिपोर्ट प्राप्त कर हाई कोर्ट के समक्ष पेश करें।
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने आई रिपोर्ट के अनुसार जून 2026 की स्थिति में बिलासपुर जिले में कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव और अन्य के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला विचाराधीन है। इसी तरह बलौदाबाजार जिले में तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश और सीजेएम कोर्ट में भिलाई विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक प्रमोद शर्मा व अन्य से संबंधित मामलों में सुनवाई जारी है। जांजगीर-चांपा जिले में विधायक बालेश्वर साहू और अन्य से जुड़े प्रकरण में वर्तमान में अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दर्ज किए जाने की प्रक्रिया चल रही है।
ईपीएफओ का बड़ा कदम: अब ‘भीम ऐप’ के जरिए होंगे क्लेम सेटलमेंट, सीधे बैंक खाते में आएगी रकम
राजधानी रायपुर की अदालतों में भी कई चर्चित और महत्वपूर्ण मामले लंबित हैं। पीएमएलए तथा ईडी के विशेष कोर्ट में विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय और पूर्व मंत्री कवासी लखमा से जुड़े मामलों में सुनवाई चल रही है। इसके अलावा सीजेएम रायपुर की अदालत में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, संजीव शुक्ला, देवेंद्र यादव, उद्देश्वरी करा और आकाश शर्मा से जुड़े पुराने मामलों की न्यायिक प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में लंबित है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपने आदेश की प्रति तत्काल संबंधित निचली अदालतों को भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि लंबित मामलों की प्रगति समय पर उच्च न्यायालय के समक्ष रखी जा सके। इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 25 अगस्त 2026 की तिथि तय की है।

