छत्तीसगढ़ के किसानों और खरीफ सीजन की तैयारियों में जुटे अन्नदाताओं के लिए राज्य सरकार ने एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर शासन ने खेती-किसानी के काम के लिए ड्रम और जरीकेन में डीजल वितरण पर लगाए गए प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से ऐलान किया है कि प्रदेश के किसानों को अपनी खेती और जुताई के कामों के लिए पर्याप्त मात्रा में डीजल मिलेगा और इसमें किसी भी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि खेतों की जुताई के लिए ट्रैक्टरों और सिंचाई पंपों के लिए किसानों को आवश्यकता के अनुसार डीजल की आसान उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जाए।
इस मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो खाद्य विभाग की ओर से इसी महीने की 22 तारीख को पेट्रोल और डीजल के संभावित दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से एक सख्त आदेश जारी किया गया था। इस निर्देश के तहत प्रदेश के सभी 2516 पेट्रोल-डीजल पंपों से ड्रम, जरीकेन या किसी भी अन्य खुले बर्तन में ईंधन देने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी। हालांकि, इस आदेश के बाद किसानों के सामने अपनी कृषि मशीनरी के लिए ईंधन जुटाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया था। वर्तमान में खरीफ सीजन की शुरुआत होने और खेतों की जुताई-बोवाई का समय नजदीक आने के कारण किसानों की जायज जरूरतों को देखते हुए सरकार ने संवेदनशीलता दिखाई और इस प्रतिबंधात्मक व्यवस्था में आवश्यक छूट दे दी, ताकि राज्य में कृषि कार्य किसी भी स्तर पर बाधित न हों।
ईंधन की उपलब्धता को लेकर सरकार ने आम जनता और किसानों को आश्वस्त किया है कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। वर्तमान में राज्य के भीतर चार करोड़ तीन लाख लीटर पेट्रोल तथा पांच करोड़ 55 लाख लीटर डीजल का बंपर स्टॉक उपलब्ध है। इसके साथ ही, आपूर्ति को निरंतर बनाए रखने के लिए बीते कल ही राज्य को 23 लाख 33 हजार लीटर पेट्रोल तथा 62 लाख 40 हजार लीटर डीजल की नई खेप भी प्राप्त हुई है। खाद्य विभाग और प्रशासन ने साफ किया है कि राज्य में जरूरत के मुताबिक पेट्रोल एवं डीजल की नियमित आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी है, इसलिए किसी भी तरह की जमाखोरी या घबराने की आवश्यकता नहीं है।
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