छत्तीसगढ़ में अनुपयोगी सरकारी जमीनों का होगा कायाकल्प: तैयार होगी रिडेव्हलपमेंट कार्ययोजना, बनेगा ‘डिजिटल लैंड बैंक’
रायपुर, 27 मई 2026
छत्तीसगढ़ में शिक्षा के स्तर को सुधारने, स्कूलों को आधुनिक बनाने और बच्चों को पढ़ाई बीच में छोड़ने से बचाने के लिए राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाने का फैसला किया है। मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज छत्तीसगढ़ समग्र शिक्षा कार्यकारिणी समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में आगामी वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना और बजट प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा कर उन्हें मंजूरी दी गई। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत होने वाले विभिन्न निर्माण कार्यों को अब शाला प्रबंधन समितियों के माध्यम से कराया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और तेजी आ सके।
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बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बजट का फोकस सिर्फ नए भवनों के निर्माण पर नहीं, बल्कि बच्चों के सीखने के स्तर को सुधारने वाले नवाचारों पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाने के लिए स्कूलों में बुनियादी संसाधन, कुशल शिक्षक और आधुनिक तकनीक, तीनों का मजबूत होना बेहद जरूरी है।
स्कूलों में छात्रों के ड्रॉपआउट की स्थिति पर अब विशेष निगरानी रखी जाएगी। कक्षा पहली, आठवीं और दसवीं में ड्रॉपआउट दर को शून्य करने के लिए एक विशेष ट्रैकिंग सिस्टम तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही शाला त्यागी बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के लिए विशेष रूप से ब्रिज कोर्स चलाए जाएंगे। स्कूलों को डिजिटल तकनीक से जोड़ते हुए माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम और आईसीटी लैब स्थापित की जाएंगी, और सभी स्कूलों में हाई-स्पीड इंटरनेट की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप राज्य के सभी शिक्षकों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके लिए गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों हेतु मास्टर ट्रेनर्स का एक विशेष पूल तैयार होगा। इसके अलावा बुनियादी सुविधाओं की जरूरत वाले स्कूलों में अतिरिक्त कक्षा-कक्ष, बालिका शौचालय, शुद्ध पेयजल, बिजली और बाउंड्रीवॉल के काम प्राथमिकता के आधार पर कराए जाएंगे।
समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बजट में दिव्यांग बच्चों हेतु संसाधन कक्ष, थेरेपी यूनिट और विशेष शिक्षण सामग्री का प्रावधान रखा गया है। वहीं कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के छात्रों के लिए कौशल विकास और वोकेशनल एजुकेशन को मजबूत किया जाएगा, जिसके तहत स्थानीय जरूरतों के अनुसार कृषि, आईटी, हेल्थकेयर और टूरिज्म जैसे ट्रेड में विशेष कोर्स संचालित किए जाएंगे।

