रांची: झारखंड में कैंसर, डायबिटीज (शुगर), हाई बीपी और हृदय रोग जैसी गंभीर गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) के उपचार और रोकथाम के लिए एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य में अब अलग-अलग योजनाओं के बजाय एक ‘एकीकृत मॉडल’ (इंटीग्रेटेड मॉडल) लागू किया जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्य सरकार के इस मॉडल को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही झारखंड इस नवाचार को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
समय पर जांच और शुरुआती पहचान पर फोकस
नयी दिल्ली के कर्तव्य भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की अपर सचिव सह मिशन निदेशक आराधना पटनायक ने इस मॉडल को मंजूरी देते हुए क्रियान्वयन के निर्देश दिए। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बीमारी के गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय समय पर जांच, स्क्रीनिंग और शुरुआती स्तर पर ही पहचान कर रोकथाम करना है।
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मरीजों को अलग-अलग स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए केंद्र के पांच प्रमुख स्वास्थ्य कार्यक्रमों को एक साथ जोड़ा जा रहा है:
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राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (NP-NCD)
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राष्ट्रीय मुख स्वास्थ्य कार्यक्रम (Oral Health Program)
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राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम
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राष्ट्रीय उपशामक देखभाल कार्यक्रम (Palliative Care)
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राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम
ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच और जनभागीदारी
पहले चरण में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, विशेषज्ञों और तकनीकी संस्थानों के साथ एक राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित होगी।दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक पहुंच बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) और सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) को भी जोड़ा जाएगा।शुरुआती जांच, इलाज, उच्च केंद्रों के लिए रेफरल और फॉलो-अप निगरानी को एक ही सिस्टम से ट्रैक किया जाएगा।
झारखंड में इस मॉडल के सफल संचालन और मूल्यांकन के बाद केंद्र सरकार इसे पूरे देश में लागू करने की योजना बना रही है।























