आगामी 14 सितंबर से दस दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत होने जा रही है। इस वर्ष वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ धार्मिक संयोग बन रहा है, जब हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का पावन पर्व एक ही दिन मनाया जाएगा। चित्रा व स्वाती नक्षत्र के साथ रवियोग, बुधादित्य योग और सोम योग के इस अद्भुत संगम में श्रद्धालु अपने घरों एवं सार्वजनिक पंडालों में विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा की स्थापना करेंगे।
‘व्रतों की त्रिवेणी’ से मिलेगा तीन गुना पुण्य फल
ज्योतिष मठ संस्थान (भोपाल) के ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम के अनुसार, 14 सितंबर को तृतीया और चतुर्थी तिथि के अद्भुत मेल के कारण हरतालिका तीज को ‘गणपति तीज’ के रूप में भी जाना जाएगा।
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शिव-गणपति की संयुक्त आराधना: शास्त्रों के अनुसार तृतीया तिथि देवाधिदेव महादेव को और चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित है। ऐसे में इस दिन शिव और गणेशजी का आवाहन एक साथ होगा।
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त्रिवेणी संयोग: 14 सितंबर को सूर्योदय के साथ हरतालिका तीज का संकल्प काल रहेगा और 15 सितंबर को पारण के समय ऋषि पंचमी का स्पर्श होगा। इस प्रकार तीज, चतुर्थी और पंचमी के मिलन से यह ‘व्रतों की त्रिवेणी’ बन रही है, जिससे व्रत व पूजन का फल तीन गुना मिलेगा।
गणेश स्थापना एवं पूजन का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषविद् अरविंद पचौरी के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ था। इस वर्ष प्रतिमा स्थापना और पूजन के लिए शुभ समय इस प्रकार रहेगा:
| विवरण | समय एवं तिथि |
| गणेश स्थापना व पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त | सुबह 11:02 बजे से दोपहर 01:31 बजे तक |
| मुहूर्त की कुल अवधि | 2 घंटे 29 मिनट |
| चतुर्थी तिथि प्रारंभ | 14 सितंबर को सुबह 07:06 बजे से |
| चतुर्थी तिथि समाप्त | 15 सितंबर को सुबह 07:44 बजे तक |
| गणेश विसर्जन (अनंत चतुर्दशी) | 25 सितंबर (शुक्रवार) |
दुर्लभ महासंयोग: चार शुभ योगों का संगम
इस बार गणेश स्थापना के दिन ग्रहों और नक्षत्रों की विशेष स्थिति बन रही है:
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नक्षत्र: चित्रा एवं स्वाती नक्षत्र का प्रभाव।
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शुभ योग: रवियोग, बुधादित्य योग तथा सोम योग का एक साथ बनना पूजा, नए कार्यों की शुरुआत और गृह प्रवेश के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जा रहा है।























